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Q: प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति मेें सबसे कम महत्त्वपूर्ण है–
  • A. शुद्ध उच्चारण
  • B. बोलने में आत्मविश्वास
  • C. मौलिक विचार
  • D. स्पष्टता
Correct Answer: Option A - प्राथमिक स्तर पर बच्चे सहज और स्वाभाविक रूप में भाषा का अर्जन करते हैं। इसमें ज्यादातर भाषा अर्जन सामाजिक अंत:क्रिया द्वारा होता है। सामाजिक अंत:क्रिया स्थापित करते समय जब वे अपनी भावनाओं, विचारों आवश्यकताओं आदि को अपनी भाषा में अभिव्यक्त करते हैं तो वह भाषा टूटी-फूटी व अव्यवस्थित होती है। धीरे-धीरे विकास क्रम के अनुरूप उनके भाषा में व्याकरणिक शुद्धता, उच्चारण शुद्धता तथा संगठित वाक्यांशों के लक्षण परिलक्षित होने लगते हैं। इसलिए प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति में सबसे कम महत्वपूर्ण उच्चारण की शुद्धता होती है।
A. प्राथमिक स्तर पर बच्चे सहज और स्वाभाविक रूप में भाषा का अर्जन करते हैं। इसमें ज्यादातर भाषा अर्जन सामाजिक अंत:क्रिया द्वारा होता है। सामाजिक अंत:क्रिया स्थापित करते समय जब वे अपनी भावनाओं, विचारों आवश्यकताओं आदि को अपनी भाषा में अभिव्यक्त करते हैं तो वह भाषा टूटी-फूटी व अव्यवस्थित होती है। धीरे-धीरे विकास क्रम के अनुरूप उनके भाषा में व्याकरणिक शुद्धता, उच्चारण शुद्धता तथा संगठित वाक्यांशों के लक्षण परिलक्षित होने लगते हैं। इसलिए प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति में सबसे कम महत्वपूर्ण उच्चारण की शुद्धता होती है।

Explanations:

प्राथमिक स्तर पर बच्चे सहज और स्वाभाविक रूप में भाषा का अर्जन करते हैं। इसमें ज्यादातर भाषा अर्जन सामाजिक अंत:क्रिया द्वारा होता है। सामाजिक अंत:क्रिया स्थापित करते समय जब वे अपनी भावनाओं, विचारों आवश्यकताओं आदि को अपनी भाषा में अभिव्यक्त करते हैं तो वह भाषा टूटी-फूटी व अव्यवस्थित होती है। धीरे-धीरे विकास क्रम के अनुरूप उनके भाषा में व्याकरणिक शुद्धता, उच्चारण शुद्धता तथा संगठित वाक्यांशों के लक्षण परिलक्षित होने लगते हैं। इसलिए प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति में सबसे कम महत्वपूर्ण उच्चारण की शुद्धता होती है।