Correct Answer:
Option B - प्रस्तुत गद्यांश के प्रथम पंक्ति के अनुसार, वास्तव में मनुष्य स्वयं को देख नहीं पाता। उसके नेत्र दूसरों के चरित्र को देखते हैं, उसका हृदय दूसरों के दोषों को अनुभव करता है तथा उसके दोष आत्मगौरव के पीछे छिपे रहते हैं। अत: विकल्प (b) अभीष्ट उत्तर है।
B. प्रस्तुत गद्यांश के प्रथम पंक्ति के अनुसार, वास्तव में मनुष्य स्वयं को देख नहीं पाता। उसके नेत्र दूसरों के चरित्र को देखते हैं, उसका हृदय दूसरों के दोषों को अनुभव करता है तथा उसके दोष आत्मगौरव के पीछे छिपे रहते हैं। अत: विकल्प (b) अभीष्ट उत्तर है।