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Q: प्रसार शिक्षण की एक व्यक्तिगत पहुँच विधि-
  • A. प्रदर्शन
  • B. परिपत्र
  • C. घर पर भेट
  • D. टीवी
Correct Answer: Option C - घर पर भेंट प्रसार शिक्षण की एक व्यक्तिगत पहुँच की विधि है। यह सम्पर्क स्थापित करने का प्रथम एवं श्रेष्ठ साधन माना जाता है इससे आमने-सामने बातचीत का अवसर मिलता है। प्रसार की इस विधि में कृषक या गृहिणी से खेत या घर पर मिला जाता है और वहीं बातचीत के द्वारा बहुत सी ज्ञान की बातें बताई और सिखाई जाती है इसमें प्रसार कार्यकर्त्ता किसान और उसके परिवार से सीधा सम्पर्क बनाता है। यह व्यक्तिगत रूप से मिलने की व्यवस्था किसी विशेष उद्देश्य और विशिष्ट प्रयोजन को पूर्ण करने हेतु की जाती है इस विधि द्वारा उसके निजी समूह की तथा सम्पूर्ण गांव की प्रमुख समस्याओ का पता लगाया जाता है। जैसे-वहाँ की भूमि सिंचाई, रोपण, प्रत्यारोपण, जल निकासी, कीडो से बचाव, कृषि यन्त्रों आदि से सम्बन्धित समस्याएँ।
C. घर पर भेंट प्रसार शिक्षण की एक व्यक्तिगत पहुँच की विधि है। यह सम्पर्क स्थापित करने का प्रथम एवं श्रेष्ठ साधन माना जाता है इससे आमने-सामने बातचीत का अवसर मिलता है। प्रसार की इस विधि में कृषक या गृहिणी से खेत या घर पर मिला जाता है और वहीं बातचीत के द्वारा बहुत सी ज्ञान की बातें बताई और सिखाई जाती है इसमें प्रसार कार्यकर्त्ता किसान और उसके परिवार से सीधा सम्पर्क बनाता है। यह व्यक्तिगत रूप से मिलने की व्यवस्था किसी विशेष उद्देश्य और विशिष्ट प्रयोजन को पूर्ण करने हेतु की जाती है इस विधि द्वारा उसके निजी समूह की तथा सम्पूर्ण गांव की प्रमुख समस्याओ का पता लगाया जाता है। जैसे-वहाँ की भूमि सिंचाई, रोपण, प्रत्यारोपण, जल निकासी, कीडो से बचाव, कृषि यन्त्रों आदि से सम्बन्धित समस्याएँ।

Explanations:

घर पर भेंट प्रसार शिक्षण की एक व्यक्तिगत पहुँच की विधि है। यह सम्पर्क स्थापित करने का प्रथम एवं श्रेष्ठ साधन माना जाता है इससे आमने-सामने बातचीत का अवसर मिलता है। प्रसार की इस विधि में कृषक या गृहिणी से खेत या घर पर मिला जाता है और वहीं बातचीत के द्वारा बहुत सी ज्ञान की बातें बताई और सिखाई जाती है इसमें प्रसार कार्यकर्त्ता किसान और उसके परिवार से सीधा सम्पर्क बनाता है। यह व्यक्तिगत रूप से मिलने की व्यवस्था किसी विशेष उद्देश्य और विशिष्ट प्रयोजन को पूर्ण करने हेतु की जाती है इस विधि द्वारा उसके निजी समूह की तथा सम्पूर्ण गांव की प्रमुख समस्याओ का पता लगाया जाता है। जैसे-वहाँ की भूमि सिंचाई, रोपण, प्रत्यारोपण, जल निकासी, कीडो से बचाव, कृषि यन्त्रों आदि से सम्बन्धित समस्याएँ।