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Q: प्रसार शिक्षा में ‘‘एक्सटेंशन’’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने और कब किया?
  • A. डे, (1892)
  • B. ई.बी.वोरहीज, (1894)
  • C. ऐलन रिचर्ड, (1895)
  • D. लैण्ड ग्रांट कॉलेज असोसिएशन,(1948)
Correct Answer: Option B - प्रसार शिक्षा में एक्सटेंशन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ई. वी. वोरहीज ने 1894 में किया। प्रसार शिक्षा दो शब्दों से मिलकर बना है, `प्रसार' (Extenstion) तथा `शिक्षा' (Education) `Extension' शब्द लैटिन भाषा के शब्द `Ex' तथा `Tensio' से मिलकर बना है। `EX' का अर्थ `out' (बाहर) और `Tensio' का अर्थ है `To spread'' (फैलाना, विस्तार करना) प्रसार शिक्षा वह शिक्षा है जो विद्यालय अथवा किसी संस्थान के सीमाओं से बाहर युवाओं तथा प्रौढों को दी जाने वाली शिक्षा है। प्रसार शिक्षा मुख्य रुप से औपचारिक शिक्षा से वंचित ग्रामीणों (कृषकों, पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों, गृहिणियों तथा स्कूल छोड़ने वाले बालकों को) दी जाती है। प्रसार शिक्षा एक निरंतर चलने वाली शिक्षा है जिसका कोई अंत नहीं है।
B. प्रसार शिक्षा में एक्सटेंशन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ई. वी. वोरहीज ने 1894 में किया। प्रसार शिक्षा दो शब्दों से मिलकर बना है, `प्रसार' (Extenstion) तथा `शिक्षा' (Education) `Extension' शब्द लैटिन भाषा के शब्द `Ex' तथा `Tensio' से मिलकर बना है। `EX' का अर्थ `out' (बाहर) और `Tensio' का अर्थ है `To spread'' (फैलाना, विस्तार करना) प्रसार शिक्षा वह शिक्षा है जो विद्यालय अथवा किसी संस्थान के सीमाओं से बाहर युवाओं तथा प्रौढों को दी जाने वाली शिक्षा है। प्रसार शिक्षा मुख्य रुप से औपचारिक शिक्षा से वंचित ग्रामीणों (कृषकों, पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों, गृहिणियों तथा स्कूल छोड़ने वाले बालकों को) दी जाती है। प्रसार शिक्षा एक निरंतर चलने वाली शिक्षा है जिसका कोई अंत नहीं है।

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प्रसार शिक्षा में एक्सटेंशन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ई. वी. वोरहीज ने 1894 में किया। प्रसार शिक्षा दो शब्दों से मिलकर बना है, `प्रसार' (Extenstion) तथा `शिक्षा' (Education) `Extension' शब्द लैटिन भाषा के शब्द `Ex' तथा `Tensio' से मिलकर बना है। `EX' का अर्थ `out' (बाहर) और `Tensio' का अर्थ है `To spread'' (फैलाना, विस्तार करना) प्रसार शिक्षा वह शिक्षा है जो विद्यालय अथवा किसी संस्थान के सीमाओं से बाहर युवाओं तथा प्रौढों को दी जाने वाली शिक्षा है। प्रसार शिक्षा मुख्य रुप से औपचारिक शिक्षा से वंचित ग्रामीणों (कृषकों, पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों, गृहिणियों तथा स्कूल छोड़ने वाले बालकों को) दी जाती है। प्रसार शिक्षा एक निरंतर चलने वाली शिक्षा है जिसका कोई अंत नहीं है।