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Q: प्रारंभिक गोथिक मोजेक कला में ‘टीसेरेई’ क्या है?
  • A. रंगों की चमक
  • B. चित्रों का दीर्घीकरण
  • C. रंगों की पारदर्शिता
  • D. छोटे रंगीन घन
Correct Answer: Option D - • टीसेरेई छोटे रंगीन घन है प्रारंभिक गोथिक मोजेक कला की विद्या प्रचलित थी। • गोथिक चित्र शैली की प्रमुख विशेषता रंजित कांच की खिड़कियाँ थी। • स्टेन ग्लास विद्या का विकास गोथिक युग में हुआ। • गोथिक शैली का आरंभ 12वीं शताब्दी में फ्रांस में हुआ। • गोथिक शैली के दरवाजे तथा खिड़कियों का शीर्ष भाग नुकीला मेहराब प्रकार का है। • गोथिक शैली का चित्रकार मास्टर ऑफ मोलिंस ने इन्द्रधनुषी रंगों में चित्रण किया।
D. • टीसेरेई छोटे रंगीन घन है प्रारंभिक गोथिक मोजेक कला की विद्या प्रचलित थी। • गोथिक चित्र शैली की प्रमुख विशेषता रंजित कांच की खिड़कियाँ थी। • स्टेन ग्लास विद्या का विकास गोथिक युग में हुआ। • गोथिक शैली का आरंभ 12वीं शताब्दी में फ्रांस में हुआ। • गोथिक शैली के दरवाजे तथा खिड़कियों का शीर्ष भाग नुकीला मेहराब प्रकार का है। • गोथिक शैली का चित्रकार मास्टर ऑफ मोलिंस ने इन्द्रधनुषी रंगों में चित्रण किया।

Explanations:

• टीसेरेई छोटे रंगीन घन है प्रारंभिक गोथिक मोजेक कला की विद्या प्रचलित थी। • गोथिक चित्र शैली की प्रमुख विशेषता रंजित कांच की खिड़कियाँ थी। • स्टेन ग्लास विद्या का विकास गोथिक युग में हुआ। • गोथिक शैली का आरंभ 12वीं शताब्दी में फ्रांस में हुआ। • गोथिक शैली के दरवाजे तथा खिड़कियों का शीर्ष भाग नुकीला मेहराब प्रकार का है। • गोथिक शैली का चित्रकार मास्टर ऑफ मोलिंस ने इन्द्रधनुषी रंगों में चित्रण किया।