Correct Answer:
Option D - प्रपर्ण: में ‘नञोऽस्त्यर्थानां वाच्यो वा चोत्तरपद लोप:’ वार्तिक से बहुव्रीहि समास है। इसका लौकिक विग्रह प्रपतितानि पर्णानि यस्य स: तथा अलौकिक विग्रह प्रपतित जस् पर्ण जस् होगा। प्रायेणान्यपदार्थप्रधानो बहुव्रीहि: समास: अर्थात् बहुव्रीहि समास प्राय: अन्यपद प्रधान होता है। जैसे – पीताम्बर:, दशानन: इत्यादि।
D. प्रपर्ण: में ‘नञोऽस्त्यर्थानां वाच्यो वा चोत्तरपद लोप:’ वार्तिक से बहुव्रीहि समास है। इसका लौकिक विग्रह प्रपतितानि पर्णानि यस्य स: तथा अलौकिक विग्रह प्रपतित जस् पर्ण जस् होगा। प्रायेणान्यपदार्थप्रधानो बहुव्रीहि: समास: अर्थात् बहुव्रीहि समास प्राय: अन्यपद प्रधान होता है। जैसे – पीताम्बर:, दशानन: इत्यादि।