search
Q: ‘परमात्मने नम:’ यहाँ ‘नम:’ के योग में जो विभक्ति है, वह है?
  • A. कारक विभक्ति
  • B. उपपद विभक्ति
  • C. (a) तथा (b) दोनों
  • D. इनमें से कोई नहीं।
Correct Answer: Option B - ‘परमात्मने नम:’ यहाँ ‘नम:’ के योग में जो विभक्ति है, वह उपपद विभक्ति है–उपपद विभक्ते: कारकविभक्तिर्बलीयसी अर्थात् पद के सम्बन्ध में होने वाली विभक्ति से क्रिया के सम्बन्ध से होने वाली विभक्ति बलवती होती है। नमस्कार अर्थवाली प्राणिपत प्रणम इत्यादि धातुओं के साथ नमस्कार्य का द्वितीया या चतुर्थी दोनों में प्रयोग करते हैं जैसे–परमात्मने नम:।
B. ‘परमात्मने नम:’ यहाँ ‘नम:’ के योग में जो विभक्ति है, वह उपपद विभक्ति है–उपपद विभक्ते: कारकविभक्तिर्बलीयसी अर्थात् पद के सम्बन्ध में होने वाली विभक्ति से क्रिया के सम्बन्ध से होने वाली विभक्ति बलवती होती है। नमस्कार अर्थवाली प्राणिपत प्रणम इत्यादि धातुओं के साथ नमस्कार्य का द्वितीया या चतुर्थी दोनों में प्रयोग करते हैं जैसे–परमात्मने नम:।

Explanations:

‘परमात्मने नम:’ यहाँ ‘नम:’ के योग में जो विभक्ति है, वह उपपद विभक्ति है–उपपद विभक्ते: कारकविभक्तिर्बलीयसी अर्थात् पद के सम्बन्ध में होने वाली विभक्ति से क्रिया के सम्बन्ध से होने वाली विभक्ति बलवती होती है। नमस्कार अर्थवाली प्राणिपत प्रणम इत्यादि धातुओं के साथ नमस्कार्य का द्वितीया या चतुर्थी दोनों में प्रयोग करते हैं जैसे–परमात्मने नम:।