Explanations:
प्रेमल्या: आदेशात् प्रेमल: हण्डीम् अवतारयत्। अर्थात् प्रेमली के आदेश से प्रेमल ऊपर रखी हण्डी को उतारता है। प्रेमल्या: रूप पञ्चमी एवं षष्ठी विभक्ति एकवचन में बनता है। इसका मूल प्रातिपदिक शब्द ‘प्रेमली’ है। यहाँ षष्ठी एकवचन का रूप का प्रयोग हुआ है।