Correct Answer:
Option C - प्रेमाख्यान काव्य परम्परा की प्रमुख रचनाओं का सही क्रम- चंदायन (1379)- मृगावती (1501)- पद्मावत (1540) - मधुमालती (1545)।
• ‘चंदायन’ मुल्लादाउद की अवधी में लिखा प्रेमाख्यानक काव्य है।
• ‘मृगावती’ कुतुबन की अवधी में लिखा प्रेमाख्यानक काव्य है।
• ‘पद्मावत’ जायसी की रचना है।
• शुक्ल जी ने ‘पद्मावत’ की कथा का पूर्वार्द्ध ‘कल्पित’ और उत्तराद्र्ध को ‘ऐतिहासिक’ कहा है।
• मधुमालती- मंझन की रचना हैं।
• बनारसी दास ने अपनी आत्मकथा ‘अर्धकथानक’ में दो प्रेमाख्यानक (1) मृगावती (2) मधुमालती का उल्लेख किया है।
C. प्रेमाख्यान काव्य परम्परा की प्रमुख रचनाओं का सही क्रम- चंदायन (1379)- मृगावती (1501)- पद्मावत (1540) - मधुमालती (1545)।
• ‘चंदायन’ मुल्लादाउद की अवधी में लिखा प्रेमाख्यानक काव्य है।
• ‘मृगावती’ कुतुबन की अवधी में लिखा प्रेमाख्यानक काव्य है।
• ‘पद्मावत’ जायसी की रचना है।
• शुक्ल जी ने ‘पद्मावत’ की कथा का पूर्वार्द्ध ‘कल्पित’ और उत्तराद्र्ध को ‘ऐतिहासिक’ कहा है।
• मधुमालती- मंझन की रचना हैं।
• बनारसी दास ने अपनी आत्मकथा ‘अर्धकथानक’ में दो प्रेमाख्यानक (1) मृगावती (2) मधुमालती का उल्लेख किया है।