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Q: ‘‘पराजेरसोढ:’’ इति सूत्रेण किं भवति?
  • A. अधिकरणसंज्ञा
  • B. सम्प्रदानसंज्ञा
  • C. अपादानसंज्ञा
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
  • E. उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति
Correct Answer: Option C - ‘‘पराजेरसोढ:’’ इति सूत्रेण ‘अपादानसंज्ञा’ भवति। अर्थात् ‘पराजेरसोढ:’ इस सूत्र से अपादान संज्ञा होती है। परा उपसर्ग पूर्वक इसी धातु का प्रयोग होने पर जो असह्य होता है उस प्रातिपदिक की अपादान संज्ञा होती है। जैसे – अध्ययनात् पराजयते। सम्प्रदान – विप्राय गां ददाति। (कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम्) अधिकरण – राम: गेहे प्रविशति। (आधारोऽधिकरणम्) अत: प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (c) है।
C. ‘‘पराजेरसोढ:’’ इति सूत्रेण ‘अपादानसंज्ञा’ भवति। अर्थात् ‘पराजेरसोढ:’ इस सूत्र से अपादान संज्ञा होती है। परा उपसर्ग पूर्वक इसी धातु का प्रयोग होने पर जो असह्य होता है उस प्रातिपदिक की अपादान संज्ञा होती है। जैसे – अध्ययनात् पराजयते। सम्प्रदान – विप्राय गां ददाति। (कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम्) अधिकरण – राम: गेहे प्रविशति। (आधारोऽधिकरणम्) अत: प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (c) है।

Explanations:

‘‘पराजेरसोढ:’’ इति सूत्रेण ‘अपादानसंज्ञा’ भवति। अर्थात् ‘पराजेरसोढ:’ इस सूत्र से अपादान संज्ञा होती है। परा उपसर्ग पूर्वक इसी धातु का प्रयोग होने पर जो असह्य होता है उस प्रातिपदिक की अपादान संज्ञा होती है। जैसे – अध्ययनात् पराजयते। सम्प्रदान – विप्राय गां ददाति। (कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम्) अधिकरण – राम: गेहे प्रविशति। (आधारोऽधिकरणम्) अत: प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (c) है।