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Q: ‘प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता’ किसकी उक्ति है?
  • A. कुन्तक
  • B. मम्मट
  • C. भट्टलोल्लट
  • D. श्री भट्टतौत
Correct Answer: Option D - प्रतिभा के महत्व के बारे में ‘‘प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता’’ उक्ति `श्री भट्तौत' जी की है। इसका अर्थ है- ‘‘प्रतिभा उस प्रज्ञा का नाम है जो नित्य नवीन रसानुकूल विचार उत्पन्न करती है।’’ आचार्य भट्टतौत का समय दशवीं सदीr उत्तरार्द्ध माना गया है। ‘काव्यकौतुक’ के रचयिता भट्टतौत का ग्रंथ अनुपलब्ध है। भट्टतौत के काव्यशास्त्रीय मतों का उल्लेख अभिनवगुप्त की ‘अभिनव भारती’ में प्राप्त होता है।
D. प्रतिभा के महत्व के बारे में ‘‘प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता’’ उक्ति `श्री भट्तौत' जी की है। इसका अर्थ है- ‘‘प्रतिभा उस प्रज्ञा का नाम है जो नित्य नवीन रसानुकूल विचार उत्पन्न करती है।’’ आचार्य भट्टतौत का समय दशवीं सदीr उत्तरार्द्ध माना गया है। ‘काव्यकौतुक’ के रचयिता भट्टतौत का ग्रंथ अनुपलब्ध है। भट्टतौत के काव्यशास्त्रीय मतों का उल्लेख अभिनवगुप्त की ‘अभिनव भारती’ में प्राप्त होता है।

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प्रतिभा के महत्व के बारे में ‘‘प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता’’ उक्ति `श्री भट्तौत' जी की है। इसका अर्थ है- ‘‘प्रतिभा उस प्रज्ञा का नाम है जो नित्य नवीन रसानुकूल विचार उत्पन्न करती है।’’ आचार्य भट्टतौत का समय दशवीं सदीr उत्तरार्द्ध माना गया है। ‘काव्यकौतुक’ के रचयिता भट्टतौत का ग्रंथ अनुपलब्ध है। भट्टतौत के काव्यशास्त्रीय मतों का उल्लेख अभिनवगुप्त की ‘अभिनव भारती’ में प्राप्त होता है।