Explanations:
`पराभवोऽप्युत्सव एवं मानिनाम्' यह सूक्ति `किरातार्जुनीयम्' महाकाव्य के प्रथम सर्ग के 41वें श्लोक से उद्धृत है। सूक्ति का तात्पर्य यह है कि ``शत्रुओं से अपराजित पराक्रम-रूपी सम्पत्ति वाले स्वाभिमानियों के लिए पराजय भी हर्ष का विषय ही है।'' प्रस्तुत सूक्ति के रचयिता भारवि हैं।