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Q: ``पराभवोऽप्युत्सव एव मानिनाम्'' इस सूक्ति के रचयिता हैं –
  • A. कालिदास
  • B. माघ
  • C. भारवि
  • D. भर्तृहरि
Correct Answer: Option C - `पराभवोऽप्युत्सव एवं मानिनाम्' यह सूक्ति `किरातार्जुनीयम्' महाकाव्य के प्रथम सर्ग के 41वें श्लोक से उद्धृत है। सूक्ति का तात्पर्य यह है कि ``शत्रुओं से अपराजित पराक्रम-रूपी सम्पत्ति वाले स्वाभिमानियों के लिए पराजय भी हर्ष का विषय ही है।'' प्रस्तुत सूक्ति के रचयिता भारवि हैं।
C. `पराभवोऽप्युत्सव एवं मानिनाम्' यह सूक्ति `किरातार्जुनीयम्' महाकाव्य के प्रथम सर्ग के 41वें श्लोक से उद्धृत है। सूक्ति का तात्पर्य यह है कि ``शत्रुओं से अपराजित पराक्रम-रूपी सम्पत्ति वाले स्वाभिमानियों के लिए पराजय भी हर्ष का विषय ही है।'' प्रस्तुत सूक्ति के रचयिता भारवि हैं।

Explanations:

`पराभवोऽप्युत्सव एवं मानिनाम्' यह सूक्ति `किरातार्जुनीयम्' महाकाव्य के प्रथम सर्ग के 41वें श्लोक से उद्धृत है। सूक्ति का तात्पर्य यह है कि ``शत्रुओं से अपराजित पराक्रम-रूपी सम्पत्ति वाले स्वाभिमानियों के लिए पराजय भी हर्ष का विषय ही है।'' प्रस्तुत सूक्ति के रचयिता भारवि हैं।