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Q: पुरा वृत्रासुर: देवान् भृशमपीडयत्। इन्द्रादय: देवा: प्रजापतिमुपागच्छन्। तान् प्रजापति: आगमनस्य कारणम् अपृच्छत्। देवा: अवदन्। प्रभो वृत्रासुर: अस्मान् पीडयति। तस्य शक्ते: समक्षं वयं स्थातुं न शक्नुम:। प्रजापति: अभणत् - हरि: एव अस्मान् रक्षितुं समर्थ:। तमेव शरणं गच्छाम:। देवै: साकं वैकुण्ठं गत्वा प्रजापति: सर्व वृत्तान्तं न्यवेदयत्। तत् श्रुत्वा हरि: अकथयत् - भो: प्रजापते! देवा: महर्षे: दधीचे: अन्तिकं गत्वा तस्मात् अस्थियाचनं कुर्वन्तु। तस्य अस्थिभि: वङ्काायुधं घटयत। तेन वृत्रासुरं हन्तुम् असुरान् च जेतुं पारयिष्यथ। तत: सर्वे देवा: दधीचे: तपोवनमगच्छन्। तस्य तपोवनं कपीनां क्रीडाभि: हरिणानां विहारै: अलीनां गुञ्जनै: च रमणीयम् आसीत्। देवा: दधीचे: आश्रमं प्राविशन्। तत्र ऋषिभि: परिवृतम् देदीप्यमानं दधीचिम् अपश्यम्। 1. अस्थिभि: किम् घटयत?
  • A. गदायुधम्
  • B. गोलायुधम्
  • C. गुटिकाम्
  • D. वङ्काायुधम्
Correct Answer: Option D - अस्थिभि: वङ्काायुधं घटयत। संस्कृत गद्य खण्ड के अनुसार देवताओं ने महर्षि दधीचि से उनकी अस्थि को माँगा और उसी अस्थि से वृत्रासुर को मारने के लिए ‘वङ्काायुध’ का निर्माण किया। अत: विकल्प (d) सही है।
D. अस्थिभि: वङ्काायुधं घटयत। संस्कृत गद्य खण्ड के अनुसार देवताओं ने महर्षि दधीचि से उनकी अस्थि को माँगा और उसी अस्थि से वृत्रासुर को मारने के लिए ‘वङ्काायुध’ का निर्माण किया। अत: विकल्प (d) सही है।

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अस्थिभि: वङ्काायुधं घटयत। संस्कृत गद्य खण्ड के अनुसार देवताओं ने महर्षि दधीचि से उनकी अस्थि को माँगा और उसी अस्थि से वृत्रासुर को मारने के लिए ‘वङ्काायुध’ का निर्माण किया। अत: विकल्प (d) सही है।