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Q: पुरा एकस्मिन् वृक्षे एका चटका प्रतिवसति स्म। कालेन तस्या: सन्तति: जाता। एकदा कश्चित् प्रमत्त: गज: तस्य वृक्षस्य अध: आगत्य तस्य शाखां शुण्डेन अत्रोटयत्। चटकाया: नीडं भुवि अपतत्। तेन अण्डानि विशीर्णानि। अथ सा चटका व्यलपत्। तस्या: विलापं श्रुत्वा काष्ठकूट: नाम खग: दु:खेन ताम् अपृच्छत् - ‘‘भद्रे किमर्थं विलपसि?’’ इति। चटकावदत् -‘‘दुष्टेनैकेन गजेन मम सन्तति: नाशिता। तस्य गजस्य वधेनैव मम दु:खम् अपसरेत्।’’ तत: काष्ठकूट: तां वीणारवा-नाम्न्या: मक्षिकाया: समीपम् अनयत्। तयो: वार्तां श्रुत्वा मक्षिकावदत् -‘‘ममापि मित्रं मण्डूक: मेघनाद: अस्ति। शीघ्रं तमुपेत्य यथोचितं करिष्याम:।’’ तदानीं तौ मक्षिकया सह गत्वा मेघनादस्य पुर: सर्वं वृत्तान्तं न्यवेदयताम्। 8. ‘अध:’ इति पदस्य विलोमपदं भवति-
  • A. भुवि
  • B. उपरि
  • C. नीचै:
  • D. पाश्र्वे
Correct Answer: Option B - ‘अध:’ इस पद का विलोम पद ‘उपरि’ है। जबकि नीचै: का विलोम पद उच्चै:, पाश्र्वे का विलोम पद समीपे तथा भुवि का विलोम पद नभे है।
B. ‘अध:’ इस पद का विलोम पद ‘उपरि’ है। जबकि नीचै: का विलोम पद उच्चै:, पाश्र्वे का विलोम पद समीपे तथा भुवि का विलोम पद नभे है।

Explanations:

‘अध:’ इस पद का विलोम पद ‘उपरि’ है। जबकि नीचै: का विलोम पद उच्चै:, पाश्र्वे का विलोम पद समीपे तथा भुवि का विलोम पद नभे है।