Correct Answer:
Option D - पालन-पोषण की प्राधिकारिक शैली, जब संभव हो तब बच्चे के साथ साझेदारी में निर्णय लेने पर आधारित है। बच्चे का पालन-पोषण बचपन से वयस्कता तक बच्चे के शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देता है और उसका समर्थन करता है। पालन-पोषण एक बच्चे को पालने की पेचीदगियों को संदर्भित करता है न कि केवल एक जैविक संबंध के लिए। पालन पोषण के दौरान बच्चों के साथ साझेदारी करने से उनका विकास सकारात्मक रूप से सम्पन्न होगा। इसमें बच्चों के पक्ष को सुनना, बच्चों के बारे में खुद निर्णय लेना एवं बच्चे से विवेकपूर्ण मांग करने पर बल दिया जाता है।
D. पालन-पोषण की प्राधिकारिक शैली, जब संभव हो तब बच्चे के साथ साझेदारी में निर्णय लेने पर आधारित है। बच्चे का पालन-पोषण बचपन से वयस्कता तक बच्चे के शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देता है और उसका समर्थन करता है। पालन-पोषण एक बच्चे को पालने की पेचीदगियों को संदर्भित करता है न कि केवल एक जैविक संबंध के लिए। पालन पोषण के दौरान बच्चों के साथ साझेदारी करने से उनका विकास सकारात्मक रूप से सम्पन्न होगा। इसमें बच्चों के पक्ष को सुनना, बच्चों के बारे में खुद निर्णय लेना एवं बच्चे से विवेकपूर्ण मांग करने पर बल दिया जाता है।