The final sentence of the poem emphasizes what attitude from the speaker.
.
The bulking of sand is due to बालू का फूलना _______ के कारण होता है। a. Viscosity/ श्यानता b. Airvoid/ वायु रन्ध्र c. Surface Moisture/ सतह में नमी
The density of rain gauge in hilly regions has recommendations by [IS:4987-1968] is: [IS:4987-1968] द्वारा अनुशंसित पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा गेज का घनत्व है:
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र.सं. 310 से 315) में सबसे उचित विकल्प चुनिए। यह तो आप जानते हैं कि पृथ्वी प्रारम्भ में आग का गोला थी। मुझे ठीक-ठीक नहीं पता कि ऐसी आग में मुझ पानी का जन्म कैसे हुआ। लगता यह है कि हमारी पृथ्वी ज्यों-ज्यों ठंडी होती गई तो उसमें मौजूद गैसों में क्रियाएँ हुई। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक क्रियाओं से मेरा जन्म हुआ है। इन दोनों ने अपना अस्तित्व मिटाकर मुझे बनाया। पहले मैं पृथ्वी के ऊपर भाप रूप में ही था। फिर जाने क्या हुआ कि मैं ठोस बर्फ बन गया। कल्पना करो चारों ओर बर्फ ही बर्फ। जब सूर्य की किरणें हम पर पड़ती तो चारों ओर सौन्दर्य बिखर पड़ता। लाखों वर्षों तक इस रूप में रहने के बाद मैं फिसलने लगा क्योंकि बर्फ के ही दबाव से निचली परत पिघलने लगी थी। फिसलकार हम पहुँचे सागर में। वहाँ की तो बात ही निराली थी। वहाँ अब तक हमसे पहले पहुँचे पानी में छोटे-छोटे जीव तैरने लगे थे। घोंघे, मछलिया और कछुवे भी। धीरे-धीरे सृष्टि का विस्तार हुआ। जल के बाद स्थल में जीव बनने लगे और आज आप उसी शृंखला के अंग हैं और अपने को मनुष्य कहते हैं। कौन-सी संज्ञा बहुवचन में नहीं है?
ग्राम पंचायत अधिकारी से उच्च अधिकारी कौन होता है? जो ब्लाक स्तर पर रहते हुए कार्य करता है?
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को कैबिनेट ने कब मंजूरी दी है?
निर्देश- प्रश्न संख्या (238 से 244) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा सप्तप्रश्नानां उचितं विकल्पं चित्वा उत्तराणि दातव्यानि। एकस्मिं नदीतीरे एक: जम्बूवृक्ष: आसीत् । तस्मिन् एक: वानर: प्रतिवसति स्म। स: नित्यं तस्य फलानि खादति स्म। कश्चित् मकरोऽपि तस्यां नद्यामवसत् । वानर: प्रतिदिनं तस्मै जम्बूफलान्यच्छत् । तेन प्रीत: मकर: तस्य वानरस्य मित्रमभवत् । एकदा मकर: कानिचित् जम्बूफलानि पत्न्यै अपि दातुं आनयत् । तानि खादित्वा तस्य जाया अचिन्तयत् अहो! य: प्रतिदिनमीदृशानि मधुराणि फलानि खादति नूनं तस्य हृदयमपि अतिमधुरं भविष्यति। सा पतिमकथयत् - ‘भो:! जम्बूभक्षकस्य तव मित्रस्य हृदयमपि जम्बूवत् मधुरं भविष्यति। अहं तदेव खादितुमिच्छामि। तस्य हृदयभक्षणे मम बलवती स्पृहा। यदि मां जीवितां द्रष्टुमिच्छसि तर्हि आनय शीघ्रं तस्य वानरस्य हृदयम्’। पत्न्या: हठात् विवश: मकर: नदीतीरे गत्वा वानरमवदत् – ‘बन्धो! तव भ्रातृजाया त्वां द्रष्टुमिच्छति। अत: मम गृहमागच्छ’। वानर: अपृच्छत् - ‘कुत्र ते गृहम् ? कथमहं तत्र गन्तं शक्नोमि ?’ मकर: अवदत् - ‘अलं चिन्तया। अहं त्वां स्वपृष्ठे धृत्वा गृहं नेष्यामि’। तस्य वचनं श्रुत्वा विश्वस्त: वानर: तस्मात् वृक्षस्कन्धात् अवतीर्य मकरपृष्ठे उपाविशत् । नदीजले वानरं विवशं मत्वा मकर: अकथयत् – ‘मम पत्नी तव हृदयं खादितुमिच्छति। तस्यै तव हृदयं दातुमेव त्वां नयामि।’ चतुर: वानर: शीघ्रमकथयत् –‘अरे मूर्ख! कथं न पूर्वमेव निवेदितं त्वया? मम हृदयं तु वृक्षस्य कोटरे एव निहितम्। अत: शीघ्रं तत्रैव नय येन अहम् स्वहृदयमानीय भ्रातृजायायै दत्त्वा तां परितोषयामि इति।’ मूर्ख: मकर: तस्य गूढमाशयं अबुद्ध्वा वानरं पुनस्तमेव वृक्षमनयत् । तत: वृक्षमारुह्य वानर: अवदत् – ‘धिङ् मूर्ख! अपि हृदयं शरीरात् पृथक तिष्ठति ? गच्छ, अत: परं त्वया सह मम मैत्री समाप्ता, सत्यमुक्तं केनचित् कविना विश्वासो हि ययोर्मध्ये तयोर्मध्येअस्ति सौहृदम्। यस्मिन्नैवास्ति विश्वास: तस्मिन् मैत्री क्व सम्भवा।।
What will the value of the following be (correct to three decimal points)? 160.342 – 32.124
Earth day is celebrated on every 22nd April related with/22 अप्रैल को मनाए जाने वाले पृथ्वी दिवस को सम्बन्ध है
Explanations:
Download our app to know more Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Excepturi, esse.
Unlocking possibilities: Login required for a world of personalized experiences.