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Q: औचित्य को काव्य की आत्मा किसने माना है?
  • A. रूय्यक
  • B. कुन्तक
  • C. क्षेमेन्द्र
  • D. मम्मट
Correct Answer: Option C - क्षेमेन्द्र ने औचित्य को काव्य की आत्मा माना है। ‘‘औचित्यं रससिद्धस्य स्थिर काव्यस्य जीवितम् अर्थात् क्षेमेन्द्र ने औचित्य को ही काव्य का प्राण कहा। इसके अतिरिक्त कुन्तक अपने ‘वक्रोक्ति सिद्धान्त’ के लिए प्रसिद्ध है।
C. क्षेमेन्द्र ने औचित्य को काव्य की आत्मा माना है। ‘‘औचित्यं रससिद्धस्य स्थिर काव्यस्य जीवितम् अर्थात् क्षेमेन्द्र ने औचित्य को ही काव्य का प्राण कहा। इसके अतिरिक्त कुन्तक अपने ‘वक्रोक्ति सिद्धान्त’ के लिए प्रसिद्ध है।

Explanations:

क्षेमेन्द्र ने औचित्य को काव्य की आत्मा माना है। ‘‘औचित्यं रससिद्धस्य स्थिर काव्यस्य जीवितम् अर्थात् क्षेमेन्द्र ने औचित्य को ही काव्य का प्राण कहा। इसके अतिरिक्त कुन्तक अपने ‘वक्रोक्ति सिद्धान्त’ के लिए प्रसिद्ध है।