Explanations:
औचित्य को काव्य की आत्मा के रूप में प्रतिष्ठित करने वाले आचार्य क्षेमेन्द्र है तथा ये औचित्य संप्रदाय के प्रवर्तक है। इन्होंने कविकण्ठाभरण, औचित्य विचार चर्चा, सुवृत्त तिलक तथा दशावतार चरित नामक काव्य ग्रंथों की रचना की। आचार्य भामह दृश्य काव्य परम्परा एवं ‘अलंकार सिद्धांत’ के प्रवर्तक माने जाते हैं।