Correct Answer:
Option B - भवन का दिक्स्थापन (Orientation of Building)– वायु की दिशा एवं सूर्य की स्थिति के सन्दर्भ में भवन की सामने वाली साइड की दिशा का निर्धारण भवन का दिक्स्थापन कहलाता है। भवन की दिशा इस प्रकार निर्धारित की जानी चाहिए कि भवन में धूप, प्रकाश एवं हवा का अधिकतम लाभ उठाया जा सके तथा साथ ही उनके हानिकारक प्रभावों से बचा जा सके।
शहरों में सामान्यत: भवनों का दिक्स्थापन वायु की दिशा व सूर्य की स्थिति के अनुसार निर्धारित करना सम्भव नहीं होता है। वहाँ पर दिक्स्थापन सामान्यत: गलियों व सड़कों की स्थिति, पार्क , प्लाट के साइज व आकार पर निर्भर करता है।
B. भवन का दिक्स्थापन (Orientation of Building)– वायु की दिशा एवं सूर्य की स्थिति के सन्दर्भ में भवन की सामने वाली साइड की दिशा का निर्धारण भवन का दिक्स्थापन कहलाता है। भवन की दिशा इस प्रकार निर्धारित की जानी चाहिए कि भवन में धूप, प्रकाश एवं हवा का अधिकतम लाभ उठाया जा सके तथा साथ ही उनके हानिकारक प्रभावों से बचा जा सके।
शहरों में सामान्यत: भवनों का दिक्स्थापन वायु की दिशा व सूर्य की स्थिति के अनुसार निर्धारित करना सम्भव नहीं होता है। वहाँ पर दिक्स्थापन सामान्यत: गलियों व सड़कों की स्थिति, पार्क , प्लाट के साइज व आकार पर निर्भर करता है।