Correct Answer:
Option C - नवंबर, 1903 में गार्नर बनाम मर्रे के विवाद में साझेदार के दिवालिया हो जाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय न्यायाधीश जायस (Joyce) ने दिया था। उस निर्णय के अनुसार –
(i) दिवालिया साझेदार की पॅूंजी की कमी को शोधक्षम्य साझेदारों की पूँजी के अनुपात में बांटा जाएगा।
(i) पॅूँजी के अनुपात उस पूँजी के अनुपात में निकालना जो कि विघटन के पूर्व बने हुए चिट्ठे में थी।
(iii) वसूली की हानि को सभी साझेदारों में लाभ अनुपात में बांटा जाएगा।
(iv) वसूली की हानि को शोधक्षम्य साझेदार द्वारा नकदी में लाना चाहिए।
अत: विकल्प (c) सही होगा।
C. नवंबर, 1903 में गार्नर बनाम मर्रे के विवाद में साझेदार के दिवालिया हो जाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय न्यायाधीश जायस (Joyce) ने दिया था। उस निर्णय के अनुसार –
(i) दिवालिया साझेदार की पॅूंजी की कमी को शोधक्षम्य साझेदारों की पूँजी के अनुपात में बांटा जाएगा।
(i) पॅूँजी के अनुपात उस पूँजी के अनुपात में निकालना जो कि विघटन के पूर्व बने हुए चिट्ठे में थी।
(iii) वसूली की हानि को सभी साझेदारों में लाभ अनुपात में बांटा जाएगा।
(iv) वसूली की हानि को शोधक्षम्य साझेदार द्वारा नकदी में लाना चाहिए।
अत: विकल्प (c) सही होगा।