Explanations:
एक फर्म के समापन पर सम्पत्तियों तथा दायित्वों के निस्तारण के लिए वसूली खाता बनाया जाता है। यदि कोई ऐसी सम्पत्ति है जिसका लेखा पुस्तकों में नहीं है तो उसको भी वसूली खाते में क्रेडिट पक्ष में दिखाया जाता है (वसूली पर) ठीक इसी तरह यदि कोई दायित्व भी है तो उसे डेबिट किया जाता है।