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Q: नवपलाशपलाशवनं पुर: स्फुटपराग परागतपङ्कजम्। मृदुलतान्तलतान्तमलोकयत् स सुरभि सुरभिं सुमनो भरै:।। अस्मिन् श्र्लोके क: अलंकार: अस्ति?
  • A. व्यतिरेक:
  • B. अनुप्रास
  • C. यमकम्
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मादधिक:
  • E. उपर्युक्तेषु किञ्चन् अपि नास्ति
Correct Answer: Option C - नवपलाशपलाशवनं .................. सुमनो भरै:।। श्लोके यमकम् अलंकार: अस्ति। प्रस्तुत श्लोक में यमक अलंकार है। लक्षण- सत्यर्थेपृथगर्थाया: स्वर व्यंजन संहते । क्रमेण तेनैवा वृतिर्यमकं विनिगद्यते।। भिन्न-भिन्न अर्थों वाले स्वर व्यंजन समुदाय की उसी क्रम में आवृति होने को यमक कहते है।
C. नवपलाशपलाशवनं .................. सुमनो भरै:।। श्लोके यमकम् अलंकार: अस्ति। प्रस्तुत श्लोक में यमक अलंकार है। लक्षण- सत्यर्थेपृथगर्थाया: स्वर व्यंजन संहते । क्रमेण तेनैवा वृतिर्यमकं विनिगद्यते।। भिन्न-भिन्न अर्थों वाले स्वर व्यंजन समुदाय की उसी क्रम में आवृति होने को यमक कहते है।

Explanations:

नवपलाशपलाशवनं .................. सुमनो भरै:।। श्लोके यमकम् अलंकार: अस्ति। प्रस्तुत श्लोक में यमक अलंकार है। लक्षण- सत्यर्थेपृथगर्थाया: स्वर व्यंजन संहते । क्रमेण तेनैवा वृतिर्यमकं विनिगद्यते।। भिन्न-भिन्न अर्थों वाले स्वर व्यंजन समुदाय की उसी क्रम में आवृति होने को यमक कहते है।