Explanations:
स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव बंगाल के सांस्कृतिक क्षेत्र में देखने को मिला। बांग्ला साहित्य के लिए यह समय स्वर्णकाल जैसा था। गुरु रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इसी समय ‘आमार सोनार बांग्ला’ नामक गीत लिखा जो 1971 में बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान बना। रबीन्द्रनाथ टैगोर को उनके गीतों के संकलन ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। भारतीय राष्ट्रगान (जन-गण-मन) इसी का हिन्दी संस्करण है जिसे 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया।