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Q: निदेश : गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र.सं. 280 से 287) में सबसे उचित विकल्प चुनिए। मैं दिखाना चाहती हूँ कि हम आलोचनात्मक शिक्षाशास्त्र के जरिए चीजों पर पर्दा डालने की कोशिश नहीं करते, क्योंकि अब तो यही चलन बन गया है। हम आमतौर पर कहते हैं– अरे, सीखने की कितना खुशनुमा माहौल है और देखो, बच्चे कैसे-कैसे प्रयोग कर रहे हैं, वगैरह। मगर अब ये खुशनुमा ढंग से सीखना भी एक ढर्रा बन गया है, इसका बहुत बेजान बना दिया गया है। हम अक्सर सोचते हैं कि बस कोई गतिविधि करना ही काफी है, भले ही वो बिल्कुल निरर्थक हो, भले ही बच्चे उसके जरिए कुछ न सीख रहे हों। बस गतिविधियाँ करवाने की मारामारी मची हुई हे। आज हमारे यहाँ यही हालात हैं। इसलिए मुझे लगता है कि हमें इस बारे में एक नए सिरे से सोचना चाहिए। बेशक, गतिविधि का महत्व है मगर बच्चों को वो चीजें मत सिखाइए जो बाद में आनी हैं। मसलन, उन्हें नंबर लाइन सिखाकर उसके आधार पर टाइम लाइन की बात मत कीजिए। हर चीज को एक संदर्भ में कीजिए। इसकी वजह यह है कि बच्चे इसी तरह सीखते हैं। संख्याएँ संदर्भ से ही आती हैं। संख्या एक बहुत अमूर्त धारणा है। एक बच्चे के लिए ‘दो’ समझना अमूर्त बात है। वह कैसे समझेगा कि किसी चीज के ‘दो’ होने का क्या मतलब है? गद्यांश के अनुसार–
  • A. गतिविधि कराना उचित नहीं है
  • B. गतिविधियों का निरंतर प्रयोग करते रहना चाहिए
  • C. गतिविधि के जरिए बच्चे कुछ नहीं सीखते
  • D. गतिविधियाँ सार्थक होनी चाहिए
Correct Answer: Option D - गद्यांश का सार यह है कि गतिविधियाँ निरंतर होने के बजाय गतिविधियाँ सार्थक होनी चाहिए।
D. गद्यांश का सार यह है कि गतिविधियाँ निरंतर होने के बजाय गतिविधियाँ सार्थक होनी चाहिए।

Explanations:

गद्यांश का सार यह है कि गतिविधियाँ निरंतर होने के बजाय गतिविधियाँ सार्थक होनी चाहिए।