Correct Answer:
Option D - निद्रा रोग (स्लीपिंग सिकनेस) ट्रिपैनोसोमा नामक प्रोटोजोआ के कारण उत्पन्न होता है। यह एक परजीवी है, जो त्सेत्से मक्खियों के शरीर में आश्रय लेता है। इन मक्खियों के काटने से जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जिससे लसिका ग्रंथिया बढ़ जाती हैं और शरीर में दर्द तथा कमजोरी महसूस होती है। रोगी दिन में भी नींद से बोझिल मालूम पड़ता है। इसके उपचार के लिए ट्रिपर्सेमाइड की सुई का पूरा कोर्स लेना चाहिए।
D. निद्रा रोग (स्लीपिंग सिकनेस) ट्रिपैनोसोमा नामक प्रोटोजोआ के कारण उत्पन्न होता है। यह एक परजीवी है, जो त्सेत्से मक्खियों के शरीर में आश्रय लेता है। इन मक्खियों के काटने से जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जिससे लसिका ग्रंथिया बढ़ जाती हैं और शरीर में दर्द तथा कमजोरी महसूस होती है। रोगी दिन में भी नींद से बोझिल मालूम पड़ता है। इसके उपचार के लिए ट्रिपर्सेमाइड की सुई का पूरा कोर्स लेना चाहिए।