Correct Answer:
Option C - रस-सिद्धान्त के प्रवर्तक आचार्य भरतमुनि माने जाते हैं। भरत का `नाट्यशास्त्र' (प्रथम शताब्दी ई.पू.) पूर्वाचार्यों की रस-विषयक उपलब्धियों को अपने में संजोये हुए है। भरत ने रस को अथर्ववेद से ग्रहीत माना है।
C. रस-सिद्धान्त के प्रवर्तक आचार्य भरतमुनि माने जाते हैं। भरत का `नाट्यशास्त्र' (प्रथम शताब्दी ई.पू.) पूर्वाचार्यों की रस-विषयक उपलब्धियों को अपने में संजोये हुए है। भरत ने रस को अथर्ववेद से ग्रहीत माना है।