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Q: निसिदिन बरसत नैन हमारे, सदा रहत पावस ऋतु हम पर जब ते स्याम सिधारे। उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा रस है?
  • A. करुण रस
  • B. वियोग शृंगार रस
  • C. शान्त रस
  • D. हास्य रस
Correct Answer: Option B - प्रश्नोक्त पंक्ति में वियोग शृंगार रस है। ध्यातव्य हो कि शृंगार रस के दो भेद-(i) संयोग शृंगार, (ii) वियोग शृंगार होते हैं। शृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ है। शृंगार रस को कार्य-व्यापार की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए महाराज भोज ने ‘रसराज’ कहा है। शेष सभी के स्थायी भाव इस प्रकार है- करुण रस – शोक शान्त रस – निर्वेद्/शम्/वैराग्य हास्य रस – हास
B. प्रश्नोक्त पंक्ति में वियोग शृंगार रस है। ध्यातव्य हो कि शृंगार रस के दो भेद-(i) संयोग शृंगार, (ii) वियोग शृंगार होते हैं। शृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ है। शृंगार रस को कार्य-व्यापार की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए महाराज भोज ने ‘रसराज’ कहा है। शेष सभी के स्थायी भाव इस प्रकार है- करुण रस – शोक शान्त रस – निर्वेद्/शम्/वैराग्य हास्य रस – हास

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प्रश्नोक्त पंक्ति में वियोग शृंगार रस है। ध्यातव्य हो कि शृंगार रस के दो भेद-(i) संयोग शृंगार, (ii) वियोग शृंगार होते हैं। शृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ है। शृंगार रस को कार्य-व्यापार की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए महाराज भोज ने ‘रसराज’ कहा है। शेष सभी के स्थायी भाव इस प्रकार है- करुण रस – शोक शान्त रस – निर्वेद्/शम्/वैराग्य हास्य रस – हास