Correct Answer:
Option B - प्रश्नोक्त पंक्ति में वियोग शृंगार रस है। ध्यातव्य हो कि शृंगार रस के दो भेद-(i) संयोग शृंगार, (ii) वियोग शृंगार होते हैं। शृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ है। शृंगार रस को कार्य-व्यापार की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए महाराज भोज ने ‘रसराज’ कहा है। शेष सभी के स्थायी भाव इस प्रकार है-
करुण रस – शोक
शान्त रस – निर्वेद्/शम्/वैराग्य
हास्य रस – हास
B. प्रश्नोक्त पंक्ति में वियोग शृंगार रस है। ध्यातव्य हो कि शृंगार रस के दो भेद-(i) संयोग शृंगार, (ii) वियोग शृंगार होते हैं। शृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ है। शृंगार रस को कार्य-व्यापार की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए महाराज भोज ने ‘रसराज’ कहा है। शेष सभी के स्थायी भाव इस प्रकार है-
करुण रस – शोक
शान्त रस – निर्वेद्/शम्/वैराग्य
हास्य रस – हास