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Q: निर्देश : (प्रश्न संख्या 23 से 25) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए: साहित्यिक समन्वय से हमारा तात्पर्य साहित्य में प्रदर्शित सुख-दुख, हर्ष-विषाद, उत्थान-पतन आदि विरोधी तथा विपरीत भावों के समीकरण तथा एक आलौकिक आनंद में उनके विलीन हो जाने में है। साहित्य के किसी अंश को लेकर देखिए, सर्वत्र यही समन्वय दिखाई देगा। भारतीय नाटकों में ही सुख और दु:ख के प्रबल घात-प्रतिघात दिखाए गये हैं, पर सबका अवसान आनंद में ही किया गया है। इसका प्रधान कारण यह है कि भारतीयों का ध्येय सदा से जीवन का आदर्श स्वरूप उपस्थित करके उसका उत्कर्ष बढ़ाने और उसे उन्नत बनाने का रहा है। वर्तमान स्थिति से उसका इतना संबंध नहीं है जितना भविष्य की संभाव्य उन्नति से है। हमारे यहाँ यूरोपीय ढंग के दुखांत नाटक इसीलिए दिखाई नहीं पड़ते हैं। यदि आजकल ऐसे नाटक दिखाई पड़ने लगे हैं, तो वे भारतीय आदर्श से दूर और यूरोपीय आदर्श के अनुकरण मात्र हैं। निर्देश : (प्रश्न संख्या 23 से 25) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए: साहित्यिक समन्वय से हमारा तात्पर्य साहित्य में प्रदर्शित सुख-दुख, हर्ष-विषाद, उत्थान-पतन आदि विरोधी तथा विपरीत भावों के समीकरण तथा एक आलौकिक आनंद में उनके विलीन हो जाने में है। साहित्य के किसी अंश को लेकर देखिए, सर्वत्र यही समन्वय दिखाई देगा। भारतीय नाटकों में ही सुख और दु:ख के प्रबल घात-प्रतिघात दिखाए गये हैं, पर सबका अवसान आनंद में ही किया गया है। इसका प्रधान कारण यह है कि भारतीयों का ध्येय सदा से जीवन का आदर्श स्वरूप उपस्थित करके उसका उत्कर्ष बढ़ाने और उसे उन्नत बनाने का रहा है। वर्तमान स्थिति से उसका इतना संबंध नहीं है जितना भविष्य की संभाव्य उन्नति से है। हमारे यहाँ यूरोपीय ढंग के दुखांत नाटक इसीलिए दिखाई नहीं पड़ते हैं। यदि आजकल ऐसे नाटक दिखाई पड़ने लगे हैं, तो वे भारतीय आदर्श से दूर और यूरोपीय आदर्श के अनुकरण मात्र हैं।
  • A. जीवन का केवल आदर्श रूप उपस्थित करना।
  • B. जीवन का उत्कर्ष बढ़ाना।
  • C. जीवन को उन्नत बनाना।
  • D. जीवन का आदर्श स्वरूप उपस्थित करके, उसका उत्कर्ष बढ़ाकर उसे उन्नत बनाना।
Correct Answer: Option D - दिये गये गद्यांश के अनुसार भारतीयों का सदा से ध्येय रहा है- ‘जीवन का आदर्श स्वरूप उपस्थित करके, उसका उत्कर्ष बढ़ाकर उसे उन्नत बनाना।
D. दिये गये गद्यांश के अनुसार भारतीयों का सदा से ध्येय रहा है- ‘जीवन का आदर्श स्वरूप उपस्थित करके, उसका उत्कर्ष बढ़ाकर उसे उन्नत बनाना।

Explanations:

दिये गये गद्यांश के अनुसार भारतीयों का सदा से ध्येय रहा है- ‘जीवन का आदर्श स्वरूप उपस्थित करके, उसका उत्कर्ष बढ़ाकर उसे उन्नत बनाना।