Correct Answer:
Option B - ‘धनाढ्यताया:’ इत्यस्मिं पदे ‘षष्ठी’ विभक्ति : वर्तते।
अर्थात्- ‘धनाढ्यताया:’ इस पद में षष्ठी विभक्ति का विधान है। (धन का) ‘षष्ठी शेषे’ इस सूत्र का अर्थ यह है कि जो बात और विभक्तियों से नहीं बतलायी जा सकती, उनको बतलाने के लिए षष्ठी विभक्ति होती है। जहाँ स्वामी तथा भृत्य, जन्य तथा जनक, कार्य तथा कारण इत्यादि सम्बन्ध दिखाये जाते हैं वहाँ षष्ठी का प्रयोग करते हैं।
जैसे- राज्ञ: पुरुष: – राजा का पुरुष
मृत्तिकाया: घट: – मिट्टी का घड़ा।
B. ‘धनाढ्यताया:’ इत्यस्मिं पदे ‘षष्ठी’ विभक्ति : वर्तते।
अर्थात्- ‘धनाढ्यताया:’ इस पद में षष्ठी विभक्ति का विधान है। (धन का) ‘षष्ठी शेषे’ इस सूत्र का अर्थ यह है कि जो बात और विभक्तियों से नहीं बतलायी जा सकती, उनको बतलाने के लिए षष्ठी विभक्ति होती है। जहाँ स्वामी तथा भृत्य, जन्य तथा जनक, कार्य तथा कारण इत्यादि सम्बन्ध दिखाये जाते हैं वहाँ षष्ठी का प्रयोग करते हैं।
जैसे- राज्ञ: पुरुष: – राजा का पुरुष
मृत्तिकाया: घट: – मिट्टी का घड़ा।