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Q: निर्देश (प्रश्न सं. 61 और 62) : दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए। स्पष्टता, आत्म-विश्वास विषय की अच्छी पकड़ और प्रभावशाली भाषा में अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करना ही सम्प्रेषण-कला है, जो निरंतर अभ्यास से निखारी जा सकती है। एक दिन में कोई अच्छा वक्ता नहीं बन सकता तथा भाषा पर अनायास ही किसी की पकड़ नहीं हो पाती। इसी अभ्यास से स्वामी विवेकानन्द ने जिस सम्प्रेषण-कला का विकास किया था, उसने विश्वधर्म-सम्मेलन में लाखों अमेरिका-निवासियों को चकित और मोहित कर दिया था।सम्प्रेषण-कला का विकास किससे होता है?
  • A. अभ्यास
  • B. भाषण
  • C. अनायास
  • D. विषय की अच्छी पकड़
Correct Answer: Option A - सम्प्रेषण कला का विकास निरंतर अभ्यास द्वारा होता है। गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सम्प्रेषण कला निरन्तर अभ्यास से निखारी जा सकती है।
A. सम्प्रेषण कला का विकास निरंतर अभ्यास द्वारा होता है। गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सम्प्रेषण कला निरन्तर अभ्यास से निखारी जा सकती है।

Explanations:

सम्प्रेषण कला का विकास निरंतर अभ्यास द्वारा होता है। गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सम्प्रेषण कला निरन्तर अभ्यास से निखारी जा सकती है।