Q: निर्देश–प्रश्न 78-83 पर्यन्तं प्रश्ना: प्रस्तुतगद्यांशमाधारीकृत्य समाधेया:– यद्यपि संसारे बहूनि वस्तूनि सन्ति, परन्तु विद्यैव सर्वश्रेष्ठधनमस्ति। अवएवोच्यते–विद्याधन सर्वप्रधानम्। विद्यया मनुष्य स्वकीयं कर्तव्यं जानाति। विद्ययैव मनुष्यो जानाति यत् को धर्म:, कोऽधर्म:, किंकर्तव्यम्, किम् अकर्तव्यम्, किं पुण्यम्, किं पापम्, किं कृत्वा लाभो भविष्यति, केन कार्येण हानि: भविष्यति। स विद्याप्राप्त्या सन्मार्गम् अनुवर्तितुं प्रयतते। एवं विद्ययैव मनुष्यो मनुष्योऽस्ति। यो मनुष्यो विद्याहीनोऽस्ति स कर्तव्याकर्तव्यस्य अज्ञानात् पशुवद् आचरति, अत: स पशुरित्यभिधीयते। `विद्याविहीन: पशु:' इति। पशुवद् क: आचरति?
A.
विद्यासहितपुरुष:
B.
विद्यायुक्तमनुष्य:
C.
विद्याहीनमनुष्य:
D.
एकाधिकविकल्पा उपयुक्ता:
E.
न कोऽपि उपयुक्त:
Correct Answer:
Option C - विद्याविहीन: मनुष्य: पशुवद् आचरति। प्रश्नानुसार विद्याविहीन मनुष्य पशु के समान आचरण करता है। कहा गया है ``विद्याविहीन: पशुभि:समाना:।''
C. विद्याविहीन: मनुष्य: पशुवद् आचरति। प्रश्नानुसार विद्याविहीन मनुष्य पशु के समान आचरण करता है। कहा गया है ``विद्याविहीन: पशुभि:समाना:।''
Explanations:
विद्याविहीन: मनुष्य: पशुवद् आचरति। प्रश्नानुसार विद्याविहीन मनुष्य पशु के समान आचरण करता है। कहा गया है ``विद्याविहीन: पशुभि:समाना:।''
Download Our App
Download our app to know more Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit.
Excepturi, esse.
YOU ARE NOT LOGIN
Unlocking possibilities: Login required for a world of personalized
experiences.