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Q: निर्देश–प्रश्न 71-77 पर्यन्तं प्रश्ना: प्रस्तुतगद्यांश माधारीकृत्य समाधेया:– अस्ति दाक्षिणात्ये जनपदे महिलारोप्यं नाम नगरम्। तत्र सकलार्थिकल्पद्रुम: प्रवरमुकुटमणिमरीचिमञ्जरीचर्चितचरणयुगल: सकलकलापारङ्गतोऽमरशक्तिर्नाम राजा बभूव। तस्य त्रय: पुत्रा: परमदुर्मेधसो बहुशक्तिरुग्रशक्तिरनन्तशक्तिश्चेति नामनो बभूवु:। अथ राजा तान् शास्त्रविमुखान् आलोक्य सचिवान् आहूय प्रोवाच–भो:! ज्ञातमेतद् भवद्भि: यन्यमैते त्रयोऽपि पुत्रा: शास्त्रविमुखविवेकरहिताश्च। तत् एतान् पश्यतो मे महदपि राज्यं न सौख्यमावहति। महिलारोप्यस्य राजा क: आसीत्?
  • A. बहुशक्ति:
  • B. अमरशक्ति:
  • C. अनन्तशक्ति:
  • D. एकाधिकविकल्पा उपयुक्ता:
  • E. न कोऽपि उपयुक्त:
Correct Answer: Option B - महिलारोप्य नगरस्य राजा अमरशक्ति: आसीत्। अर्थात् महिलारोप्य नगर का राजा अमरशक्ति है। पञ्चतन्त्र कथा का आरम्भ यहीं से होता है। दाक्षिणात्य जनपद में महिलारोप्य नाम का नगर है। वहाँ याचकों को कल्पद्रुम के समान मुकुटमणि तुल्य, सकल कलाओं में पारङ्गत अमरशक्ति नाम का राजा था।
B. महिलारोप्य नगरस्य राजा अमरशक्ति: आसीत्। अर्थात् महिलारोप्य नगर का राजा अमरशक्ति है। पञ्चतन्त्र कथा का आरम्भ यहीं से होता है। दाक्षिणात्य जनपद में महिलारोप्य नाम का नगर है। वहाँ याचकों को कल्पद्रुम के समान मुकुटमणि तुल्य, सकल कलाओं में पारङ्गत अमरशक्ति नाम का राजा था।

Explanations:

महिलारोप्य नगरस्य राजा अमरशक्ति: आसीत्। अर्थात् महिलारोप्य नगर का राजा अमरशक्ति है। पञ्चतन्त्र कथा का आरम्भ यहीं से होता है। दाक्षिणात्य जनपद में महिलारोप्य नाम का नगर है। वहाँ याचकों को कल्पद्रुम के समान मुकुटमणि तुल्य, सकल कलाओं में पारङ्गत अमरशक्ति नाम का राजा था।