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Q: निर्देश (प्र. सं. 123-131) नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए। स्थूल एवं बाह्य पदार्थ एवं मानसिक पदार्थों एवं भावों की अपेक्षा अधिक महत्व के विषय नहीं है। जो व्यक्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ है, उसे भौतिक स्थूल लाभ अथवा प्रलोभन न तो लुभाते हैं और न ही प्रोत्साहित करते हैं। विश्व में विचारक दस में से एक ही व्यक्ति होता है। उसमें भौतिक महत्वाकांक्षाएँ अत्यल्प होती हैं। ‘पूँजी’ का रचयिता कार्ल माक्र्स जीवनभर निर्धनता से जूझता रहा। राज्याधिकारियों ने सुकरात को मरवा डाला, पर वह जीवन के अन्तिम क्षणों में भी शान्त था, क्योंकि वह अपने जीवन के लक्ष्य का भली-भाँति निर्वाह कर चुका था। यदि उसे पुरस्कृत किया जाता, प्रतिष्ठा के अम्बारों से लाद दिया जाता, परन्तु अपना काम न करने दिया जाता तो निश्चय ही वह अनुभव करता कि उसे कठोर रूप में दण्डित किया गया है। ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब हमें बाहरी सुख-सुविधाएँ आकर्षित करती हैं, वे अच्छे जीवन के लिए अनिवार्य लगने लगती हैं, किन्तु महत्वपूर्ण यह है कि क्या हमने जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर लिया? यदि इसका उत्तर हाँ है, तो बाह्य वस्तुओं का अभाव नहीं खलेगा और यदि नहीं है, तो हमें अपने को भटकने से बचाना होगा और लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा।सुकरात को अपना काम न करने देने की स्थिति कठोर दण्ड जैसी प्रतीत होती, क्योंकि–
  • A. वह जीवन के कार्य समाप्त कर चुका था
  • B. वह स्थूल प्रलोभनों की अपेक्षा नहीं करता था
  • C. उसे जीवन का उद्देश्य प्राप्त करने में रोक दिया गया होता
  • D. वह अन्तिम क्षणों में भी शान्त था
Correct Answer: Option C - यदि सुकरात को उसके जीवन के उद्देश्य प्राप्त करने से रोक दिया गया होता तो यह स्थिति उसके लिए किसी दण्ड से कम नहीं होती, क्योंकि जो व्यक्ति रचनात्मक प्रवृत्ति के होते हैं। वे केवल रचनात्मक कार्य से ही संतुष्ट होते हैं कोई भी भौतिक प्रलोभन उन्हें रचनात्मकता से रोक नहीं पाते, बल्कि वे ऐसे व्यक्ति के लिए दण्ड स्वरूप ही होते हैं।
C. यदि सुकरात को उसके जीवन के उद्देश्य प्राप्त करने से रोक दिया गया होता तो यह स्थिति उसके लिए किसी दण्ड से कम नहीं होती, क्योंकि जो व्यक्ति रचनात्मक प्रवृत्ति के होते हैं। वे केवल रचनात्मक कार्य से ही संतुष्ट होते हैं कोई भी भौतिक प्रलोभन उन्हें रचनात्मकता से रोक नहीं पाते, बल्कि वे ऐसे व्यक्ति के लिए दण्ड स्वरूप ही होते हैं।

Explanations:

यदि सुकरात को उसके जीवन के उद्देश्य प्राप्त करने से रोक दिया गया होता तो यह स्थिति उसके लिए किसी दण्ड से कम नहीं होती, क्योंकि जो व्यक्ति रचनात्मक प्रवृत्ति के होते हैं। वे केवल रचनात्मक कार्य से ही संतुष्ट होते हैं कोई भी भौतिक प्रलोभन उन्हें रचनात्मकता से रोक नहीं पाते, बल्कि वे ऐसे व्यक्ति के लिए दण्ड स्वरूप ही होते हैं।