Q: निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिये गये प्रश्नों (प्रश्न सं. 74-78) के उत्तर सबसे उचित विकल्प चुनकर दीजिये : मोर के सिर की कलगी और सघन, ऊँची तथा चमकीली हो गई। चोंच अधिक बंकिम और पैनी हो गई, गोल आँखों में इंद्रनी की नीलाभ द्युति झलकने लगी। लंबी नील-हरित ग्रीवा की हर, भंगिमा में धूपछाँही तरंगें उठने-गिरने लगी। दक्षिण-वाम दोनों पंखों में सलेटी और सपेâद आलेखन स्पष्ट होने लगे। पूँछ लंबी हुई और उसके पंखों पर चंद्रिकाओं के इंद्रधनुषी रंग उद्दीप्त हो उठे। रंग-रहित पैरों को गरवीली गति ने एक नयी गरिमा से रंजित कर दिया। उसका गरदन ऊँची कर देखना, विशेष भंगिमा के साथ उसे नीची कर दाना चुगना, पानी पीना, टेढ़ी कर शब्द सुनना आदि क्रियाओं में जो सुकुमारता और सौंदर्य था, उसका अनुभव देखकर ही किया जा सकता है। गति का चित्र नहीं आँका जा सकता। मोरनी का विकास मोर के समान चमत्कारिक तो नहीं हुआ-परंतु अपनी लंबी धूपछाँही गरदन, हवा में चंचल कलगी, पंखों की श्याम-श्वेत पत्रलेखा, मंथर गति आदि से वह भी मोर की उपयुक्त सहचारिणी होने का प्रमाण देने लगी।किसकी क्रियाओं में सुकुमारता व सौंदर्य था?
A.
मोर की
B.
मोरनी की
C.
तोते की
D.
लेखिका की
Correct Answer:
Option A - मोर की क्रियाओं में सुकुमारता व सौन्दर्य था। उपर्युक्त गद्यांश में मोर के विभिन्न क्रिया कलापों का मनोरम वर्णन किया गया है।
A. मोर की क्रियाओं में सुकुमारता व सौन्दर्य था। उपर्युक्त गद्यांश में मोर के विभिन्न क्रिया कलापों का मनोरम वर्णन किया गया है।
Explanations:
मोर की क्रियाओं में सुकुमारता व सौन्दर्य था। उपर्युक्त गद्यांश में मोर के विभिन्न क्रिया कलापों का मनोरम वर्णन किया गया है।
Download Our App
Download our app to know more Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit.
Excepturi, esse.
YOU ARE NOT LOGIN
Unlocking possibilities: Login required for a world of personalized
experiences.