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Q: निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 99 से 105) में सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। जीवन में कभी अभाव का दुख, कभी स्वभाव का और कभी दुर्भाव का और इससे भी ऊपर सदैव तनाव का दुख घेरे रहता है। इन्हीं दुखों के वशीभूत हम टकराव की जिंदगी जीते हुए बिखराव का दुख भोगते हैं। दुखों से सभी डरते हैं, क्योंकि दुख अप्रिय हैं। दुखों से दूर रहने और सुख पाने की चाह में हम नए-नए पापों में प्रवेश करने लगते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी भूल होती है। पाप का फल सुख रोकता है। सुख चाहिए तो पापों से मुक्त होने की चाह जागृत करनी होगी। दुखों से छुटकारा और सुख प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है धर्म को आत्मसात करना। जहाँ धर्म है, वहाँ पाप नहीं है और जब पाप नहीं तो वहाँ दुख नहीं। जहाँ दुख नहीं वहाँ सुख को अनंत होने का पूरा अवसर प्राप्त होता है। दुख हमारी भूल और हमारे मानवीय स्तर से गिरकर घिनौने कर्मो का फल है। समूह से भिन्न शब्द है :
  • A. पापी
  • B. धर्म
  • C. सुख
  • D. दुख
Correct Answer: Option A - गद्यांश में धर्म, सुख, दुख, पाप शब्दों का प्रयोग तो किया गया हैं किन्तु ‘पापी’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। अत: ‘पापी’ शब्द समूह से भिन्न है।
A. गद्यांश में धर्म, सुख, दुख, पाप शब्दों का प्रयोग तो किया गया हैं किन्तु ‘पापी’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। अत: ‘पापी’ शब्द समूह से भिन्न है।

Explanations:

गद्यांश में धर्म, सुख, दुख, पाप शब्दों का प्रयोग तो किया गया हैं किन्तु ‘पापी’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। अत: ‘पापी’ शब्द समूह से भिन्न है।