Q: निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए (प्र.सं. 371 से 378) : जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भाँति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते है और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमश: क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बना जाता है। लेखक ने किसे सबसे बड़ा पाप कहा है?
A.
प्रकाश पाने की क्षीण आकांक्षा
B.
मनुष्य का अने प्रति पाप न करना
C.
अंधकार को स्वीकार न करना
Correct Answer:
Option C - लेखक अंधकार को स्वीकार कर लेने को सबसे बड़ा पाप कहा है। क्योंकि गद्यांश में लेखक कहा है कि मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप समझता हूँ।
C. लेखक अंधकार को स्वीकार कर लेने को सबसे बड़ा पाप कहा है। क्योंकि गद्यांश में लेखक कहा है कि मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप समझता हूँ।
Explanations:
लेखक अंधकार को स्वीकार कर लेने को सबसे बड़ा पाप कहा है। क्योंकि गद्यांश में लेखक कहा है कि मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप समझता हूँ।
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