Q: निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्र.सं. 310 से 315) में सबसे उचित विकल्प चुनिए। यह तो आप जानते हैं कि पृथ्वी प्रारम्भ में आग का गोला थी। मुझे ठीक-ठीक नहीं पता कि ऐसी आग में मुझ पानी का जन्म कैसे हुआ। लगता यह है कि हमारी पृथ्वी ज्यों-ज्यों ठंडी होती गई तो उसमें मौजूद गैसों में क्रियाएँ हुई। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक क्रियाओं से मेरा जन्म हुआ है। इन दोनों ने अपना अस्तित्व मिटाकर मुझे बनाया। पहले मैं पृथ्वी के ऊपर भाप रूप में ही था। फिर जाने क्या हुआ कि मैं ठोस बर्फ बन गया। कल्पना करो चारों ओर बर्फ ही बर्फ। जब सूर्य की किरणें हम पर पड़ती तो चारों ओर सौन्दर्य बिखर पड़ता। लाखों वर्षों तक इस रूप में रहने के बाद मैं फिसलने लगा क्योंकि बर्फ के ही दबाव से निचली परत पिघलने लगी थी। फिसलकार हम पहुँचे सागर में। वहाँ की तो बात ही निराली थी। वहाँ अब तक हमसे पहले पहुँचे पानी में छोटे-छोटे जीव तैरने लगे थे। घोंघे, मछलिया और कछुवे भी। धीरे-धीरे सृष्टि का विस्तार हुआ। जल के बाद स्थल में जीव बनने लगे और आज आप उसी शृंखला के अंग हैं और अपने को मनुष्य कहते हैं। यह आत्मकथा किसकी है?
A.
पानी की
B.
मनुष्य की
C.
पृथ्वी की
D.
बर्फ की
Correct Answer:
Option A - गद्यांश में निहित कथन पानी के प्रतीत होते हैं, अत: यह आत्मकथा पानी की है।
A. गद्यांश में निहित कथन पानी के प्रतीत होते हैं, अत: यह आत्मकथा पानी की है।
Explanations:
गद्यांश में निहित कथन पानी के प्रतीत होते हैं, अत: यह आत्मकथा पानी की है।
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