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Q: निर्देश : नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं. 37 से 45) के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। राष्ट्रीय पर्वों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान गीत गाए जाएँ, कविताएँ सुनी और सुनायी जाएँ, इसे लेकर माता-पिताओं, स्कूल और समाज में व्यापक सहमति है, लेकिन गीत-कविताएँ बच्चों के जीवन में रच-बस जाएँ, वे उनका भरपूर आनंद लेने लगें, खुद तुकबंदियाँ करने लगें, रचने लगें, यह माता-पिता को मंजूर नहीं। माता को लगता है ऐसा करते हुए तो वे उस राह से भटक जाएँगे जिस राह पर वे उन्हें चलाना चाहते हैं। जिस राह से वे उन्हें अपनी सोची हुई मंजिल पर पहुँचाना चाहते हैं। उनकी इस इच्छा में यह निहित है कि बच्चे वैसा कुछ भी नहीं करें, जो वे करना चाहते हैं। बल्कि वे वैसा करें जैसा माता-पिता चाहते हैं। उनके भीतर बच्चे के स्वतंत्रतापूर्वक सीखने की प्रक्रिया के प्रति सतत संदेह और गहरा डर बना रहता है। यही हाल स्कूल का भी है। गीत-कविता स्कूल और कक्षाओं की रोजमर्रा की गतिविधि का हिस्सा बन जाए यह स्वूâल को मंजूर नहीं। स्कूल को लगता है इस सबके लिए समय कहाँ है। यह पाठ्य-पुस्तक से बाहर की गतिविधि है। शिक्षक और शिक्षा अधिकारी चाहते हैं शिक्षक पहले परीक्षा परिणाम बेहतर लाने के लिए काम करें। दूसरी ओर हमारी संस्कृति और समाज में गीत-कविता की जो जगहें थीं वे जगहें लगातार सीमित हुई हैं। गीत गाने, सुनने सुनाने के अवसर हुआ करते थे, वे अक्सर ही गीत-कविताओं को गुनगुनाते रह सकने के लिए याद करने को प्रेरित करते थे। सहेजने और रचने के लिए प्रेरित करते थे। इस सबके लिए अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत नहीं पड़ती थी, वह जीवन-शैली का स्वाभाविक हिस्सा था। बच्चों के लिए पढ़ाई से अधिक खेलने-कूदने के लिए समय और जगहें थीं। खेलने-कूदने की मस्ती के दौरान ही उनके बीच से स्वतः ही नये खेलों, तुकबंदियों और खेलगीतों और बालगीतों का सृजन भी हो जाया करता था। उनकी ये रचनाएँ चलन में आ जाया करती थीं, जबान पर चढ़ जाती थीं और सालों-साल उनकी टोलियों के बीच बनी रहती थीं। समय के साथ उनमें कुछ कमी पाए जाने पर संशोधित होती रहती थीं। गीत-कविता स्कूलों को भी पसंद नहीं है, क्योंकि उन्हें लगता है कि -
  • A. स्कूली पढ़ाई-लिखाई से इसका कोई संबंध नहीं है
  • B. इससे बच्चों का बहुत समय नष्ट होता है
  • C. इससें परीक्षा परिणाम देर से आएँगे
  • D. यह सीखना बहुत ही कठिन काम है
Correct Answer: Option A - गीत-कविता स्कूलों को भी पसन्द नहीं है, क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चों के स्कूली पठन-पाठन से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है।
A. गीत-कविता स्कूलों को भी पसन्द नहीं है, क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चों के स्कूली पठन-पाठन से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है।

Explanations:

गीत-कविता स्कूलों को भी पसन्द नहीं है, क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चों के स्कूली पठन-पाठन से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है।