Q: निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों (प्रं.सं. 237-242) में सबसे उचित विकल्प चुनिए। लोक कथाएँ हमारे आम जीवन में सदियों से रची-बसी हैं। इन्हें हम अपने बड़े-बूढ़ों से बचपन से ही सुनते आ रहे हैं। लोक कथाओं के बारे में यह भी कहा जाता हैं कि बचपन के शुरूआती वर्षों में बच्चों को अपने परिवेश की महक, सोच व कल्पना की उड़ान देने के लिए इनका उपयोग जरूरी है। हम यह भी सुनते हैं कि बच्चों के भाषा के विकास के संदर्भ में भी इन कथाओं की उपयोगिता महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन लोक कथाओं के विभिन्न रूपों में हमें लोक जीवन के तत्त्व मिलते हैं जो बच्चों के भाषा विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाते हैं। अगर हम अपनी पढ़ी हुई लोक कथाओं को याद करें तो सहजता से हमें इनके कई उदाहरण मिल जाते हैं। जब हम कहानी सुना रहे होते हैं तो बच्चों से हमारी यह अपेक्षा रहती है कि वे पहली घटी घटनाओं को जरूर दोहराएँ। बच्चे भी घटना को याद रखते हुए साथ-साथ मजे से दोहराते हैं। इस तरह कथा सुनाने की इस प्रक्रिया में बच्चे इन घटनाओं को एक क्रम में रखकर देखते हैं। इन क्रमिक घटनाओं में एक तर्वâ होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है। (क्या बताती हैं लोक कथाएँ–कमलेश चंद्र जोशी)‘परिवेश की महक’ पद का अर्थ है–
A.
परिवेश की विशिष्टताएँ, सीमाएँ
B.
परिवेश की कहानियाँ
C.
परिवेश की खुशबू
D.
परिवेश की गंध
Correct Answer:
Option A - ‘परिवेश की महक’ का अर्थ है– परिवेश की विशिष्टताएँ, सीमाएँ।
A. ‘परिवेश की महक’ का अर्थ है– परिवेश की विशिष्टताएँ, सीमाएँ।
Explanations:
‘परिवेश की महक’ का अर्थ है– परिवेश की विशिष्टताएँ, सीमाएँ।
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