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Q: निर्देश: अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानां (प्रश्न संख्या 276-285) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: समुचितम्। उत्तरं चित्वा लिखत। अनादिकालात् प्रचलन्त्याम् अस्माकम् परम्परायां बहव: वैदिका: ऋषय: अभवन्। महर्षि: वसिष्ठ: महर्षि: विश्वामित्र: च वैदिक-कालीनौ ऋषी आस्ताम्। उचिते वयसि यथोचितं व्रतं पालयन्तौ तौ महान्तौ तपस्विनौ अभवताम्। योग्याद् गुरो: स्वाध्यायम् अधीयानौ तौ ज्ञानिनौ सञ्जातौ। एवं तयो: उभयो: पाश्र्वे तु ज्ञानस्य भण्डार एव आसीत्। अनयो: महर्षि: विश्वामित्र: स्वभावेन क्रोधी आसीत्। परन्तु उग्राणि तपांसि समाचरता तेन ब्रह्मर्षिषु स्थानं प्राप्तम्। प्रसिद्धं गायत्री-मन्त्रं समाजाय प्रयच्छता तेन अचिरात् प्रसिद्धि: लब्धा। जपत: जनान् अभीष्टफलं प्रददती गायत्रीलोके कामधेनुरूपेण प्रसिद्धं प्राप्तवती। मुक्तिं कामयमानौ: जनै: गायत्री-मन्त्रस्य शक्त्या भास्वत: सूर्यदेवात् सद्बुद्धि प्राथ्र्यते। महर्षि: वसिष्ठ: सततं ब्रह्म उपासीन: महतीं सिद्धि प्राप्तवान्। वसिष्ठेन मृत्युं वशीकुर्वत: महामृत्यृञ्जयमन्त्रस्य रचना कृता। एकदा सतसङ्ग तपश्चरणयो: मध्ये कतर: श्रेष्ठ: इति विषये विवाद: अभवत्। वसिष्ठ: सत्सङ्गस्य पक्षे आसीत्। विश्वामित्रस्य तु स्वतपस्यायाम् अभिमान: आसीत्। परस्परं विवादमानयो: एतयो: विवादे असमाहिते च तौ क्षीरसागरे भगवत: शेषनागस्य सविधे निर्णयार्थम् अगच्छताम्। शेषनाग: द्वयोर्मध्य सत्सङ्ग: एव श्रेयान् इत्युक्त्वा विवादस्य समाधानं कृतवान्।ज्ञानस्य प्राप्त्यै कस्य अपेक्षा भवति?
  • A. योग्य-गुरो:
  • B. उपयुक्तवातावरणस्य
  • C. पाठ्यपुस्तकस्य
  • D. पाठ्यसामग्रीणाम्
Correct Answer: Option A - ज्ञान की प्राप्ति हेतु अच्छे (योग्य) गुरू की अपेक्षा होती है। योग्य गुरू जो ज्ञान लब्ध होता है, वही शिष्य को योग्य बना सकता है। ‘अन्यथा अन्धेनैव नीयमाना यथन्धा’ की स्थिति होती है।
A. ज्ञान की प्राप्ति हेतु अच्छे (योग्य) गुरू की अपेक्षा होती है। योग्य गुरू जो ज्ञान लब्ध होता है, वही शिष्य को योग्य बना सकता है। ‘अन्यथा अन्धेनैव नीयमाना यथन्धा’ की स्थिति होती है।

Explanations:

ज्ञान की प्राप्ति हेतु अच्छे (योग्य) गुरू की अपेक्षा होती है। योग्य गुरू जो ज्ञान लब्ध होता है, वही शिष्य को योग्य बना सकता है। ‘अन्यथा अन्धेनैव नीयमाना यथन्धा’ की स्थिति होती है।