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Q: निर्देश : (96-100) दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढि़ए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए। भारत वर्ष बहुत बड़ा देश है। इसका इतिहास बहुत पुराना है। इस इतिहास का जितना अंश जाना जा सकता है, उसकी अपेक्षा जितना नहीं जाना जा सकता, वह और भी पुराना और महत्वपूर्ण है। न जाने किस अज्ञात काल से नाना जातियाँ आ-आकर इस देश में बसती रही हैं और इसकी साधना को नाना भाव से मोड़ती रही हैं, नाना रूप देती रहीं हैं और समृद्ध करती रही हैं। इस देश का सबसे पुराना उपलब्ध साहित्य आर्यों का है। इन्हीं आर्यों के धर्म और विश्वास नाना अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों में बनते-बदलते अब तक इस देश की अधिकांश जनता के निजी धर्म और विश्वास बने हुए हैं। परन्तु आर्यों का साहित्य कितना भी पुराना और विशाल क्यों न हो भारतवर्ष के समूचे जन-समूह के विकास अध्ययन के लिए न तो वह पर्याप्त ही और न अविसंवादी। इस देश में बहुत-सी आर्येतर जातियाँ अत्यंत सभ्य और संस्कृत जीवन व्यतीत करती थीं, बहुत-सी ऐसी भी थीं जिनके आचार-विचार में जंगलीपन का प्राधान्य था। संघर्ष में पड़कर आर्यों को दोनों प्रकार की जातियों से प्रभावित होना पड़ा। भारत का सबसे पुराना साहित्य–
  • A. सभी भारतीयों के धर्म और विश्वास का साहित्य है।
  • B. अनार्यों का है।
  • C. बड़े जन-समूह के विकास को समझने में अपर्याप्त है।
  • D. भारत के जन-समूह को समग्रता में समझने में सहायक है।
Correct Answer: Option D - दिए गए गद्यांश का उचित शीर्षक ‘जल’ होगा। क्योंकि गद्यांश में जल के महत्व के विषय में बताया गया है।
D. दिए गए गद्यांश का उचित शीर्षक ‘जल’ होगा। क्योंकि गद्यांश में जल के महत्व के विषय में बताया गया है।

Explanations:

दिए गए गद्यांश का उचित शीर्षक ‘जल’ होगा। क्योंकि गद्यांश में जल के महत्व के विषय में बताया गया है।