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Q: .
  • A. नामवर सिंह
  • B. कमलेश्वर
  • C. मधुरेश
  • D. राजेंद्र यादव
Correct Answer: Option B - ‘‘जैनेद्र की सृजन प्रक्रिया में नैतिक विशिष्टता और अज्ञेय में वैयक्तिक विशिष्टता के बावजूद कहीं-कहीं उसके सामान्यीकरण के अन्तर्द्वन्द्व का भी आभास मिलता है, जहाँ पात्र और स्थितियाँ स्वयं प्रमुख हो उठती हैं।’’ उक्त कथन कथालोचक कमलेश्वर’ का है। • आलोचक नामवर सिंह ने कहा है कि ‘‘विश्व साहित्य में भारतीय कहानियों का अपना मौलिक चरित्र है और विश्व साहित्य में जब कभी भारतीय कहानियों की बात होगी तो प्रेमचंद के साथ जैनेन्द्र को जरूर याद किया जाएगा। जैनेन्द्र की प्रमुख कृतियाँ - फाँसी (1929ई.), वातायन (1930 ई.), नीलम देश की राजकन्या (1933ई.), एक रात (1934ई.), दो चिडि़याँ (1935ई.), पाजेब (1942ई.), जयसंधि (1949ई.), आदि।
B. ‘‘जैनेद्र की सृजन प्रक्रिया में नैतिक विशिष्टता और अज्ञेय में वैयक्तिक विशिष्टता के बावजूद कहीं-कहीं उसके सामान्यीकरण के अन्तर्द्वन्द्व का भी आभास मिलता है, जहाँ पात्र और स्थितियाँ स्वयं प्रमुख हो उठती हैं।’’ उक्त कथन कथालोचक कमलेश्वर’ का है। • आलोचक नामवर सिंह ने कहा है कि ‘‘विश्व साहित्य में भारतीय कहानियों का अपना मौलिक चरित्र है और विश्व साहित्य में जब कभी भारतीय कहानियों की बात होगी तो प्रेमचंद के साथ जैनेन्द्र को जरूर याद किया जाएगा। जैनेन्द्र की प्रमुख कृतियाँ - फाँसी (1929ई.), वातायन (1930 ई.), नीलम देश की राजकन्या (1933ई.), एक रात (1934ई.), दो चिडि़याँ (1935ई.), पाजेब (1942ई.), जयसंधि (1949ई.), आदि।

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‘‘जैनेद्र की सृजन प्रक्रिया में नैतिक विशिष्टता और अज्ञेय में वैयक्तिक विशिष्टता के बावजूद कहीं-कहीं उसके सामान्यीकरण के अन्तर्द्वन्द्व का भी आभास मिलता है, जहाँ पात्र और स्थितियाँ स्वयं प्रमुख हो उठती हैं।’’ उक्त कथन कथालोचक कमलेश्वर’ का है। • आलोचक नामवर सिंह ने कहा है कि ‘‘विश्व साहित्य में भारतीय कहानियों का अपना मौलिक चरित्र है और विश्व साहित्य में जब कभी भारतीय कहानियों की बात होगी तो प्रेमचंद के साथ जैनेन्द्र को जरूर याद किया जाएगा। जैनेन्द्र की प्रमुख कृतियाँ - फाँसी (1929ई.), वातायन (1930 ई.), नीलम देश की राजकन्या (1933ई.), एक रात (1934ई.), दो चिडि़याँ (1935ई.), पाजेब (1942ई.), जयसंधि (1949ई.), आदि।