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Q: निर्देश (271-279): निम्नलिखिम गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह सदैव अपनी इच्छापूर्ति में लगा रहता है। मगर इच्छाएँ कभी पूर्ण नहीं होती हैं। एक इच्छा की पूर्ति होती है, तो दूसरी जन्म लेती है इस प्रकार इच्छाओं का अनवरत क्रम चलता रहता है। यही इच्छाएँ ही मनुष्य के दु:ख का कारण होती है। यदि हमें सच्चा सुख पाना है, तो अपनी इच्छाओं का दमन करना होगा। भारतीय मनीषियों ने कहा था – जीवन में सफलता की प्राप्ति के लिए जिन गुणों को आवश्यक माना जाता है, उनमें संतोष का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के ऋषियों ने लोभ को मानव का शत्रु कहा है। काम,क्रोध, लोभ और मोह को जीवन के विनाश का द्वार माना जाता है। संतोष द्वारा लोभ से मुक्ति मिलती है। संतोष के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति महापुरुष बन सकता है। ‘महापुरूष’ में समास है-
  • A. अव्ययीभाव
  • B. तत्पुरुष
  • C. कर्मधारय
  • D. बहुब्रीहि
Correct Answer: Option C - ‘महापुरुष’ में कर्मधारय समास है। कर्मधारय समास- जिस तत्पुरुष समास के समस्त होने वाले पद समानाधिकरण हों, अर्थात विशेष्य-विशेषण-भव को प्राप्त हों, कर्ताकारक के हों और लिंग वचन में समान हों। वहाँ ‘कर्मधारय तत्पुरुष समास’ होता है। बहुब्रीहि- समास में आये पदों को छोड़कर जब किसी अन्य पदार्थ की प्रधानता हो, तब उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं। अव्ययीभाव- जिसमें पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समास पद अव्यय हो जाए।
C. ‘महापुरुष’ में कर्मधारय समास है। कर्मधारय समास- जिस तत्पुरुष समास के समस्त होने वाले पद समानाधिकरण हों, अर्थात विशेष्य-विशेषण-भव को प्राप्त हों, कर्ताकारक के हों और लिंग वचन में समान हों। वहाँ ‘कर्मधारय तत्पुरुष समास’ होता है। बहुब्रीहि- समास में आये पदों को छोड़कर जब किसी अन्य पदार्थ की प्रधानता हो, तब उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं। अव्ययीभाव- जिसमें पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समास पद अव्यय हो जाए।

Explanations:

‘महापुरुष’ में कर्मधारय समास है। कर्मधारय समास- जिस तत्पुरुष समास के समस्त होने वाले पद समानाधिकरण हों, अर्थात विशेष्य-विशेषण-भव को प्राप्त हों, कर्ताकारक के हों और लिंग वचन में समान हों। वहाँ ‘कर्मधारय तत्पुरुष समास’ होता है। बहुब्रीहि- समास में आये पदों को छोड़कर जब किसी अन्य पदार्थ की प्रधानता हो, तब उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं। अव्ययीभाव- जिसमें पूर्वपद की प्रधानता हो और सामासिक या समास पद अव्यय हो जाए।