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Q: निर्देश (175-180) : निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । कुछ ऐसे पूरब के गाँव की हवा चली, खपरैलों की दुनिया आँख खोलने लगी। जमे हुए धुएँ-सी पहाड़ी है दूर की, काजल की रेख-सी कतार है खजूर की सोने का कलश लिए उषा चली आ रही, माथे पर दमक रही आभा सिंदूर की। ‘उषा चली आ रही’ पंक्ति में ______ अलंकार है।
  • A. अनुप्रास
  • B. उपमा
  • C. रूपक
  • D. मानवीकरण
Correct Answer: Option D - पद्यांश में आयी ‘उषा चली आ रहीं’ पंक्ति में मानवीकरण अलंकार है। यहाँ भोर में फैलते प्रकाश की तुलना मानव से की जा रही है। जहाँ जड़ पर चेतन का आरोप हो अर्थात् प्रकृति पर मानवीय भावनाओं तथा क्रियाओं का आरोप हो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
D. पद्यांश में आयी ‘उषा चली आ रहीं’ पंक्ति में मानवीकरण अलंकार है। यहाँ भोर में फैलते प्रकाश की तुलना मानव से की जा रही है। जहाँ जड़ पर चेतन का आरोप हो अर्थात् प्रकृति पर मानवीय भावनाओं तथा क्रियाओं का आरोप हो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।

Explanations:

पद्यांश में आयी ‘उषा चली आ रहीं’ पंक्ति में मानवीकरण अलंकार है। यहाँ भोर में फैलते प्रकाश की तुलना मानव से की जा रही है। जहाँ जड़ पर चेतन का आरोप हो अर्थात् प्रकृति पर मानवीय भावनाओं तथा क्रियाओं का आरोप हो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।