Correct Answer:
Option B - ल्यप्प्रत्ययान्तं पदं प्रतिरुध्य भवेत।
अर्थात् दिये गये पदों में ल्यप्प्रत्ययान्त पद है। प्रतिरुध्य।
प्रति + रुध् + ल्यप् · प्रतिरुध्य
ल्यप् प्रत्यय- ल्यप् प्रत्यय में ल् तथा प् का लोप हो जाने पर ‘य’ शेष रहता है। धातु से पूर्व कोई उपसर्ग हो तो क्त्वा’ के स्थान पर ‘ल्यप्’ प्रत्यय प्रयुक्त होता है। यह ल्यप् प्रत्यय भी ‘कर’ या करके अर्थ में होता है। यह अव्यय शब्द होता है अत: इसके रूप नहीं चलते।
B. ल्यप्प्रत्ययान्तं पदं प्रतिरुध्य भवेत।
अर्थात् दिये गये पदों में ल्यप्प्रत्ययान्त पद है। प्रतिरुध्य।
प्रति + रुध् + ल्यप् · प्रतिरुध्य
ल्यप् प्रत्यय- ल्यप् प्रत्यय में ल् तथा प् का लोप हो जाने पर ‘य’ शेष रहता है। धातु से पूर्व कोई उपसर्ग हो तो क्त्वा’ के स्थान पर ‘ल्यप्’ प्रत्यय प्रयुक्त होता है। यह ल्यप् प्रत्यय भी ‘कर’ या करके अर्थ में होता है। यह अव्यय शब्द होता है अत: इसके रूप नहीं चलते।