Correct Answer:
Option C - जयपुर के ‘राजा जयसिंह प्रथम’ की सभा के विख्यात विद्वान राजपुरोहित ‘पण्डित यशोधर’ ने 11वीं शताब्दी में कामसूत्र की टीका ‘जयमंगला’ नाम से प्रस्तुत की। काम सूत्र के प्रथम अधिकरण के तीसरे अध्याय की टीका करते हुए यशोधर ने आलेख्य (चित्र कला) के छ: अंग बताये।
रूपभेदा: प्रमाणानि भावलावण्य योजनम्।
सादृश्यं वर्णिका भंग इति चित्र षडंग:कम।
C. जयपुर के ‘राजा जयसिंह प्रथम’ की सभा के विख्यात विद्वान राजपुरोहित ‘पण्डित यशोधर’ ने 11वीं शताब्दी में कामसूत्र की टीका ‘जयमंगला’ नाम से प्रस्तुत की। काम सूत्र के प्रथम अधिकरण के तीसरे अध्याय की टीका करते हुए यशोधर ने आलेख्य (चित्र कला) के छ: अंग बताये।
रूपभेदा: प्रमाणानि भावलावण्य योजनम्।
सादृश्यं वर्णिका भंग इति चित्र षडंग:कम।