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Q: Name of Ramagupta of the Gupta Dynasty appears in which inscription? किस अभिलेख में गुप्त वंश के शासक रामगुप्त का नाम आता है?
  • A. Prayag Inscription of Samudragupta समुद्रगुप्त का प्रयाग अभिलेख
  • B. Banskhera Inscription of Harshavardhan हर्षवर्धन का बांसखेड़ा अभिलेख
  • C. Sanjan Copper Plate Inscription of Amoghvarsh/अमोघवर्ष का संजन ताम्र पर लेख
  • D. Kahaum Inscription of Skandagupta/ स्कन्दगुप्त का काहौम अभिलेख
Correct Answer: Option C - गोविन्द तृतीय की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र अमोघवर्ष प्रथम राष्ट्रकूट सिंहासन पर बैठा। उस समय, इसकी अवस्था 7वर्ष थी। यह विद्या और कला का उदार संरक्षक था। वह स्वयं एक विद्वान तो था ही साथ ही विद्वानों का आश्रयदाता भी था। संजन ताम्रलेख में विद्या तथा साहित्य के संरक्षक के रूप में उसे गुप्त शासक ‘साहसांक’ (चन्द्रगुप्त द्वितीय) से भी महान बताया गया। संजन ताम्र लेख में गुप्त वंश के शासक रामगुप्त का भी उल्लेख है। अमोघवर्ष ने कन्नड़ में कविराजमार्ग नामक पुस्तक लिखी जो कन्नड़ साहित्य के प्रारम्भिक रचनाओं में एक है तथा प्रश्नोत्तर रत्नमालिका (संस्कृत में लिखा गया नीति ग्रन्थ) की रचना की।
C. गोविन्द तृतीय की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र अमोघवर्ष प्रथम राष्ट्रकूट सिंहासन पर बैठा। उस समय, इसकी अवस्था 7वर्ष थी। यह विद्या और कला का उदार संरक्षक था। वह स्वयं एक विद्वान तो था ही साथ ही विद्वानों का आश्रयदाता भी था। संजन ताम्रलेख में विद्या तथा साहित्य के संरक्षक के रूप में उसे गुप्त शासक ‘साहसांक’ (चन्द्रगुप्त द्वितीय) से भी महान बताया गया। संजन ताम्र लेख में गुप्त वंश के शासक रामगुप्त का भी उल्लेख है। अमोघवर्ष ने कन्नड़ में कविराजमार्ग नामक पुस्तक लिखी जो कन्नड़ साहित्य के प्रारम्भिक रचनाओं में एक है तथा प्रश्नोत्तर रत्नमालिका (संस्कृत में लिखा गया नीति ग्रन्थ) की रचना की।

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गोविन्द तृतीय की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र अमोघवर्ष प्रथम राष्ट्रकूट सिंहासन पर बैठा। उस समय, इसकी अवस्था 7वर्ष थी। यह विद्या और कला का उदार संरक्षक था। वह स्वयं एक विद्वान तो था ही साथ ही विद्वानों का आश्रयदाता भी था। संजन ताम्रलेख में विद्या तथा साहित्य के संरक्षक के रूप में उसे गुप्त शासक ‘साहसांक’ (चन्द्रगुप्त द्वितीय) से भी महान बताया गया। संजन ताम्र लेख में गुप्त वंश के शासक रामगुप्त का भी उल्लेख है। अमोघवर्ष ने कन्नड़ में कविराजमार्ग नामक पुस्तक लिखी जो कन्नड़ साहित्य के प्रारम्भिक रचनाओं में एक है तथा प्रश्नोत्तर रत्नमालिका (संस्कृत में लिखा गया नीति ग्रन्थ) की रचना की।