Correct Answer:
Option B - आरंभबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया के आरंभ होने की स्थिति का बोध होता है। जैसे-
1- अब मोहन खेलने लगा है।
2- अब सीता चलने लगी है।
सातत्यबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया की प्रक्रिया की निरन्तरता का बोध होता है। जैसे- रमा कितना स्वादिष्ट भोजन पका रही है।
प्रगतिबोधक पक्ष:- इसमें क्रिया की निरंतर प्रगति का बोध होता है। जैसे-अनीता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
पूर्णताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया की पूर्ण समाप्ति का ज्ञान होता है। जैसे-वह तब तक जा चुका था।
क्रिया प्रक्रिया (व्यापार) की इकाई के रूप में निम्नवत् वर्गीकरण किया जाता है-
नित्यताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के आद्यन्त का निश्चय नहीं हो पाता अर्थात् क्रिया सदैव एक समान बनी रहती है। जैसे:-
सूर्य के बाद ही चन्द्रमा का उदय होता है।
अभ्यासबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के नैसर्गिक रूप से होने की सूचना प्राप्त होती है। जैसे - दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।
B. आरंभबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया के आरंभ होने की स्थिति का बोध होता है। जैसे-
1- अब मोहन खेलने लगा है।
2- अब सीता चलने लगी है।
सातत्यबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया की प्रक्रिया की निरन्तरता का बोध होता है। जैसे- रमा कितना स्वादिष्ट भोजन पका रही है।
प्रगतिबोधक पक्ष:- इसमें क्रिया की निरंतर प्रगति का बोध होता है। जैसे-अनीता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
पूर्णताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया की पूर्ण समाप्ति का ज्ञान होता है। जैसे-वह तब तक जा चुका था।
क्रिया प्रक्रिया (व्यापार) की इकाई के रूप में निम्नवत् वर्गीकरण किया जाता है-
नित्यताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के आद्यन्त का निश्चय नहीं हो पाता अर्थात् क्रिया सदैव एक समान बनी रहती है। जैसे:-
सूर्य के बाद ही चन्द्रमा का उदय होता है।
अभ्यासबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के नैसर्गिक रूप से होने की सूचना प्राप्त होती है। जैसे - दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।