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Q: निम्नलिखित पर विचार करें: 1. नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशीला विश्वविद्यालय दोनों पाल वंश के दौरान विकसित हुए। 2. नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशीला विश्वविद्यालय दोनों खिलजी वंश द्वारा नष्ट कर दिए गए। उक्त कथनों में से कौन-सा सत्य है?
  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1 न ही 2
Correct Answer: Option A - गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त के शासन काल में नालन्दा वि.वि. की स्थापना हुई थी। इस विश्वविद्यालय को ‘आक्सफोर्ड आफ महायान बौद्ध’ कहा जाता है। पाल वंश के संस्थापक गोपाल के बाद उसका पुत्र धर्मपाल बंगाल का शासक बना। इसे ‘उत्तरापथ स्वामी’ कहा जाता है। धर्म पाल एक उत्साही बौद्ध था उसके लेखों में उसे ‘परम सौगात’ कहा गया है। उसने बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की। नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय खिलजी वंश (1290–1320 ई.) द्वारा नहीं नष्ट किये गये थे, बल्कि इन्हें कुतबुद्दीन ऐबक के सेनापति इख्तियारूद्दीन-मुहम्मद बख्तियार खिलजी द्वारा लगभग 1202 ई. में निष्ट किया गया था। अत: केवल कथन (1) सत्य है।
A. गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त के शासन काल में नालन्दा वि.वि. की स्थापना हुई थी। इस विश्वविद्यालय को ‘आक्सफोर्ड आफ महायान बौद्ध’ कहा जाता है। पाल वंश के संस्थापक गोपाल के बाद उसका पुत्र धर्मपाल बंगाल का शासक बना। इसे ‘उत्तरापथ स्वामी’ कहा जाता है। धर्म पाल एक उत्साही बौद्ध था उसके लेखों में उसे ‘परम सौगात’ कहा गया है। उसने बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की। नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय खिलजी वंश (1290–1320 ई.) द्वारा नहीं नष्ट किये गये थे, बल्कि इन्हें कुतबुद्दीन ऐबक के सेनापति इख्तियारूद्दीन-मुहम्मद बख्तियार खिलजी द्वारा लगभग 1202 ई. में निष्ट किया गया था। अत: केवल कथन (1) सत्य है।

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गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त के शासन काल में नालन्दा वि.वि. की स्थापना हुई थी। इस विश्वविद्यालय को ‘आक्सफोर्ड आफ महायान बौद्ध’ कहा जाता है। पाल वंश के संस्थापक गोपाल के बाद उसका पुत्र धर्मपाल बंगाल का शासक बना। इसे ‘उत्तरापथ स्वामी’ कहा जाता है। धर्म पाल एक उत्साही बौद्ध था उसके लेखों में उसे ‘परम सौगात’ कहा गया है। उसने बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की। नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय खिलजी वंश (1290–1320 ई.) द्वारा नहीं नष्ट किये गये थे, बल्कि इन्हें कुतबुद्दीन ऐबक के सेनापति इख्तियारूद्दीन-मुहम्मद बख्तियार खिलजी द्वारा लगभग 1202 ई. में निष्ट किया गया था। अत: केवल कथन (1) सत्य है।