Correct Answer:
Option D - –(1) पुत्र: मातु: स्मरति। यह शुद्ध वाक्य है।
'अधीगर्थदयेशां कर्मणि' स्मरण अर्थ (से पूर्व का स्मरण) की धातुओं के साथ कर्म में षष्ठी विभक्ति होती है। पुत्र: मातु: स्मरति। (खेदपूर्वक माता को स्मरण करता है)। अत: मातु: में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ।
2) ‘स्मृ’ धातु के साथ साधारण स्मरण में द्वितीया विभक्ति होती है।
यथा - पाठं स्मरति, ईश्वरं स्मरति।
D. –(1) पुत्र: मातु: स्मरति। यह शुद्ध वाक्य है।
'अधीगर्थदयेशां कर्मणि' स्मरण अर्थ (से पूर्व का स्मरण) की धातुओं के साथ कर्म में षष्ठी विभक्ति होती है। पुत्र: मातु: स्मरति। (खेदपूर्वक माता को स्मरण करता है)। अत: मातु: में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ।
2) ‘स्मृ’ धातु के साथ साधारण स्मरण में द्वितीया विभक्ति होती है।
यथा - पाठं स्मरति, ईश्वरं स्मरति।